Book Title: Sramana 2002 01
Author(s): Shivprasad
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 175
________________ १७० : श्रमण/जनवरी-जून २००२ संयुक्तांक श्री सौभाग्य मुनि जी 'कुमुद' का चातुर्मास अहमदाबाद में श्रमण संघीय महामन्त्री श्री सौभाग्य मुनि जी 'कुमुद एवं उपप्रवर्तक श्री विजयमुनि जी 'वागीश' ठाणा ५ का दि० १८ जुलाई को शाहीबाग, अहदाबाद में चातुर्मासार्थ मंगल प्रवेश हुआ। इसी अवसर पर स्व० उपाध्याय कन्हैयालाल जी 'कमल' द्वारा सम्पादित गणितानुयोग भाग २ के विमोचन का कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ। श्री गणेश प्रसाद वर्णी स्मृति साहित्य पुरस्कार हेतु ग्रन्थ आमन्त्रित श्री स्याद्वाद महाविद्यालय, भदैनी, वाराणसी द्वारा प्रवर्तित श्री गणेश प्रसादवर्णी स्मृति साहित्य पुरस्कार, वर्ष २००२ के पुरस्कार के लिये जैन धर्म, दर्शन, साहित्य, सिद्धान्त, समाज, संस्कृति, भाषा एवं इतिहास विषयक मौलिक सृजनात्मक, चिन्तन, अनुसन्धानात्मक, शास्त्रीय परम्परा युक्त कृति की ४ प्रतियाँ ३१ अगस्त २००२ तक आमन्त्रित हैं। ज्ञातव्य है कि इस पुरस्कार में ५००१/- रुपया नकद तथा प्रशस्तिपत्र प्रदान किया जाता है। वर्ष २००१ का उक्त पुरस्कार सुप्रसिद्ध सर्वोदयी विचारक एवं लेखक श्री जमनालाल जैन को उनकी कृति चिन्तन प्रवाह: · सेवा से श्रेयस की ओर को प्रदान करने की घोषणा की जा चुकी है। श्री हीरालाल जैन अध्यक्ष निर्वाचित पंचकूला ४ अगस्त : समाजरत्न श्री हीरालाल जैन (लुधियाना) सर्वसम्मति से ४ अगस्त को श्री जिनेन्द्र गुरुकुल, पंचकूला (हरियाणा) की प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इस अवसर पर समाज के २० अन्य व्यक्ति भी कार्यसमिति के सदस्य चुने गये। श्री हीरालाल जैन को कार्यसमिति के पदाधिकारियों को नियुक्त करने का भी अधिकार दिया गया। हमारे लिये यह अत्यन्त गौरव की बात है कि श्री हीरालाल जी पार्श्वनाथ विद्यापीठ के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। विद्यापीठ परिवार श्री हीरालाल जी की इस उपलब्धि पर उनका हार्दिक अभिनन्दन करता है। श्रद्धाञ्जलि श्री नरेन्द्रपत सिंह जी दूगड़ का निधन जैन भवन, कोलकाता के अध्यक्ष तथा स्थायी ट्रस्टी श्री नरेन्द्रपत सिंह दूगड़ का १ जनवरी २००२ को देहावसान हो गया। आपका जन्म १९१६ ई० में हैरावत स्टेट के जमींदार सुरपत सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती मैना कुमारी देवी की कुक्षी से हुआ। आपकी शिक्षा प्रेसीडेन्सी कॉलेज, कलकत्ता में हुई। आपके पास प्राचीन और नवीन सिक्कों का बड़ा संग्रह था और इस सम्बन्ध में आप अच्छी जानकारी रखते थे। आपके तीन पुत्र और एक पुत्री हैं। आपकी स्मृति में जैन भवन में ५ जनवरी को दिन में ३.०० Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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