Book Title: Sramana 1998 10
Author(s): Shivprasad
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 143
________________ ४८५ लेख # Jain Education International ६ १ १८ ९ २८ For Private & Personal Use Only किसकी जय कौन भूखे मरेंगे क्या आप असुन्दर हैं? क्या रावण के दस मुख थे ? खोज सम्बन्धी कुछ अनुभव और समस्यायें गंगा का जल लेय अरघ गंगा को दीना गजेटियर ऑफ इंडिया में जैनी और जैनधर्म घरों में बच्चे चलिए और खूब चलिए चातुर्मास व्यवस्था में सुधार कीजिये जब आप घर से अकेली निकलें जिन्दगी किसे कहते हैं? 'जी' की आत्मकथा जीवन चरित्र ग्रन्थ जीवन की सच्ची क्रान्ति जीवन धर्म जीवित धर्म श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक प्रो० इन्द्रचंद्र शास्त्री श्री पीटर फ्रीमैन कुमारी रेणुका चक्रवर्ती डॉ० के० ऋषभ चन्द्र डॉ० धीरेन्द्र वर्मा पं० जमनालाल जैन श्री सुबोधकुमार जैन श्रीमती ब्रजेशकुमारी याज्ञिक वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन श्री अन्नराज जैन कु० रूपलेखा वर्मा प्रिंस क्रोपाटकिन प्रो० देवेन्द्रकुमार जैन श्री अगरचंद नाहटा मुनिश्री पद्मविजय जी श्री बशिष्ठनारायण सिन्हा डॉ० राधाकृष्णन् ๓ แ แ7 ๙ ง 6 ง แต่ : 9 แ7 ง 8 * * ) .18 or or a vow in orar or w x na ई० सन् १९५२ १९५४ १९५४ १९६७ १९५१ १९५७ १९७० १९५७ १९५५ १९६३ १९५६ १९५५ १९५६ १९५९ १९६२ १९६० १९५७ पृष्ठ ३३-३७ १४-१७ ३४-३८ २२-२४ ९-१२ २३-२८ २८-३५ ५४-६० २७-२९ २१-२३ १९-२० १७ ४ www.jainelibrary.org १५-१७ ३५-३८ २५-२७ २३-२६ ८ ३४

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