Book Title: Sramana 1998 10
Author(s): Shivprasad
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 166
________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में से समाज के सभी वर्ग, संत-सती एवं धर्म में रुचि 'खने वालों की जिज्ञासा शांत होगी, वहीं इस कार्य द्वारा देश की सेवा भी होगी। पद्मश्री श्री पाटोदी ने भी इस अवसर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। समारोह का संचालन श्री हस्तीमल झेलावत और आभार प्रदर्शन श्री अनिल भंडारी ने किया। सम्राट खारवेल स्मृति पुस्तकालय भवन का शिलान्यास सम्पन्न नई दिल्ली १९ नवम्बर : कुन्दकुन्द भारती, नई दिल्ली के परिसर में सम्राट खारवेल स्मृति पुस्तकालय भवन का उड़ीसा के मुख्यमंत्री माननीय श्री जानकी वल्लभ पटनायक के करकमलों द्वारा दिनांक २९ नवम्बर को आयोजित एक भव्य समारोह में शिलान्यास किया गया। पूज्य आचार्य श्री विद्यानन्द जी महाराज के स..भ्य में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध उद्योगपति साहू श्री रमेशचन जैन की। इस समारोह में बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्ध वर्ग उपस्थित थे। जैनधर्म-दर्शन का शरद्कालीन शिक्षण शिविर सम्पन्न दिल्ली १६ अक्टूबरः भोगीलाल लहेरचन्द इस्टिट्यूट ऑफ इण्डोलाजी, दिल्ली में प्रथम बार १५ दिवसीय शरद्कालीन विशेष शिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। दि० ३ अक्टूबर से प्रारम्भ हुए इस शिविर का उद्घाटन टाइस ऑफ इण्डिया के प्रबन्ध सम्पादक साहू रमेशचन्द्र जैन ने किया। इस शिक्षण शिविर में देश भर से चुने हुए ३५ अध्येताओं ने भाग लिया। १६ अक्टूबर को अयोजित समापन समारोह के अवसर पर श्री के० पी० ए० मेनन, कुलाधिपति, श्री लालबहादुरशास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली, प्रो० वाचस्पति उपाध्याय, प्रखर चिन्तक प्रो० नामवर सिंह, प्राकृत भाषा एवं साहित्य के मूर्धन्य विद्वान् स्वनामधन्य प्रो० सत्यरंजन बनर्जी तथा भारत सरकार के कई उच्चपदाधिकारी उपस्थित थे। अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने शिविर के आयोजकों की सराहना की और अपने सुझाव भी दिये। श्रीमती विनय जैन का अनुकरणीय प्रयास अन्य भारतीय समाजों की भांति जैन समाज में भी बढ़ते हुए आडम्बरों, फिजूलखर्ची, त्योहारों पर उपहारों के आदान-प्रदान आदि को रोकने के लिए अखिल भारतीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कान्फ्रेन्स की महिला शाखा की नवनिर्वाचित अध्यक्षा श्रीमती विनय जैन ने उक्त कुप्रथा के विरोध में समाचार पत्रों और सभी स्थानकों में इस्तहार लगवा कर एक अनुकरणीय कार्य किया है और इसमें बहुत अंशों Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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