Book Title: Shatak Prakaranam
Author(s): Veer Samaj
Publisher: Veer Samaj
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पियट्टणमओवि अणियट्टिणामा ते ॥ १ ॥ " बायरो संपराओ जस्स सो बायरसंपरागो, संपरायसदो सन्बकम्मेसु बट्टमाणो अहिकारवसाओ फसायबाई परिग्गहिओ । बायरकसाए वेरमाणो बायरसंपरागो ति वुच्चर, अणियट्टी य सो वायर संपरागो यसो अनियट्टियायरसंपरागो, अनियट्टिवायरसंपरायं पषिद्वा अजियट्टिवायरसंदरावपविट्ठा, तेसु अणियट्टिबायरसम्परायपत्रिहेड्नु अस्थि उवसमंगा खवगा य " भावं न नियट्टेई विसुद्धलेसो विरुद्धमयरागो । किट्टीकरणरणभो बायररागो मुणेयत्रो ॥ १ ॥ सो पुत्रफडगाणं हेट्ठा अण्णाणि फडुगाई तु । पकरेह अपुत्र्वाई अणन्तगुणहीयमाणाई ॥ २ ॥ तत्तो अफगट्ठा बहुगा करे किट्टीओ । पुवाओ य अपुव्वेर्हितो बोकड्ढिय परसे ॥ ३ ॥ तो बाबर कट्टीओ वेपमाणो करे सुमाओ । वायरकिट्टीहेट्ठा किट्टीओ सुद्धलेसाओ ॥ ४ ॥ वेड वायराओ किट्टीओ तेण बायरो णाम । कम्प्राणि उवसमन्तो उवसमगो खवणओ खवगो ॥ ५ ॥ णासेइ तओ खबओ लोमं मोत्तूण मोहवीसमवि । अह थीणगिद्धिति ममवि तेरस णामावि एत्थेव ॥ ६ ॥ उवसामगस्स अत्थो इमो " सो पुञ्वफगाण तु सुदुमा ओकट्टिऊणं किट्टीओ पकरेह य उबसमो उवसमयति मोहवीसमवि ॥ ७ ॥ वमन्तं जं कम्मं ण य ओकड्ढर ण देइ उदयवि । ण य गमया परपराई ण चैव ओढते तं तु ॥ ८ ॥ " सुदुमसंम्परागपट्ठेिसु अत्थि उवसामगा बगाइ ति सुदुमो सम्पराओ जस्स सो सुदुमसम्पराओ, सुडुमसम्परायं पविट्ठा सुदुमसम्परोपपविट्ठा, तेसु सुदुमसम्परायपविट्ठेसु अत्थि उवसामगा खवगा य, बायररागेण कयाओ किट्टीओ सुडुमो बेपर जतो । आह पत्थं गाहाओ " सम्मं भावपरायणगुणेण किट्टीपकिट्टिकरणेण । मोहस्सेकारसमी बारसमी वावि जा किट्टी ॥ १ ॥ वारसमी जा किट्टी सुद्धा किट्टी करेह सुडुमाभो । एक्कारसमीऍ ठिओकड्डिय हुमा किट्टीओ ॥ २ ॥ बायररागेण कया सुडुमो वेपर सुहुमकिट्टीओ । तम्हा सुडुमकसाओ सुडुमो सुष्प योगप्पा ॥ ३ ॥ डवसमगो उवसमयइ खवगो णासेर सुडुमकिट्टीओ । ते पुण विसुद्धभावा जन्ति दुवे दुविहसेढीभो ॥ ४ ॥ "
उवसन्तकसायवीयरायछउमत्ये सि-उवसन्ता कसाया जेसिं ते भवन्ति उवसन्तकसाया, बीमो रागो जेसिं ते
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