Book Title: Shatak Prakaranam
Author(s): Veer Samaj
Publisher: Veer Samaj

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Page 25
________________ mARKAR पंच, मरणभावो तम्भावेण णस्थि तिनमा एए निन्निविन संभवन्ति । ‘णव सत्ता' ति संजयासंजयभप्पमसअपुबकरणार जाप खीणकसायो एपसु सनम णव-णष जोगा भवन्ति, सम्मामिच्छाठिीस्स जे दस ते चेष वेडाव्ययका. यजोगरहिया णव भवन्ति, वेउब्धियं पा ण फरेन्ति ति वेउब्बियकाओगो णत्थि । 'पकमि इंति एकारस' नि एकमिपमत्तसंजयम्मि एक्कारस जोगा, पुषुत्ता जब माहारककायजोगमाहारकमिस्सकायजोगसहिया एक्कारस भवन्ति, आहारगकामोगो आहारगमिस्सकायजोगो य आहारगलशिसाहवस्म संजवस्स माहारगसरीरं उप्पएन्तस्स पमनो उप्पापइ, न मप्पमत्तो त्ति नम्मि एक्कारस । पत्य गमविरयप्पमत्ताणं केसिंचि वेउब्धियकायजागा भत्यि ति ने पुण एवं पदन्नि 'तेरस चउमु दसंगे पंचमु णव दोम हान्ति एकारा' ति तेरस चउम' त्ति-पुष्वं तिण्हं तेरस तेरस जोगा भाणया, चउत्यो पमत्तसंजओ, पकारस ते चेव वेडाचय (माहारग) दुगसहिया तेरस पमत्तसंजयस्स भवन्ति । दमगे त्ति भणियं, 'पंचम् णव 'सि-देसपिरयमप्पमत्ते मोजूण सेसा पंच तेम पत्ता णव । 'दोस होन्ति पकारस' ति देसविरयमप्पमत्ताणं एकारस, पुषुत्ता णष बेउब्धियदुगसहिया एकारस रेसविरयस्स, ते चेव बेउब्धियमाहारगकायसहिया एकारस अप्पमत्तस्स, कह? वेउब्धियमाहारगअन्तकाले पमत्तो अप्पमनमावं लभति ति काउं 'एकम्मि मत जोग' सि एकम्मि सजोगिकेवलिम्मि सत्त जोगा, सचमणजोगो, असचमोसमबजोगो, एवं वायावि, ओरालियकायजागो, ओरालियामिक्सकाआगो कम्मइगकाभोग इति । मणवाया मोसजुत्ता ण संभवन्ति उमत्थरहिनन्यात् । ओरालियमिस्सकाओगा कम्मागकाभागा व समुग्घायगयस्म, मोरालियकायजोगो सठाणे, मेसा ण ममपन्ति । 'भजोगिट्टाणं हवा एक ' ति जोगविरहियं ठाणं एक अजोगिठाणमेव, मनोषाकायरहितत्वात् ॥ १२ ॥ १३ ॥ उदोगा जोगविही य जीवठाणगुणठाणेसु मणिया । इयाणि जप्पचाइमो बन्धो जेसु ठामु तं भन्नचउपञ्चड़ओ बन्धो पदमे उबरिमनिगं तिपचडओ । मीमग बीओ उपरिमदगं च देसिकदेमम्मि ॥१४॥

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