Book Title: Shatak Prakaranam
Author(s): Veer Samaj
Publisher: Veer Samaj

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Page 26
________________ शनक ॥१२॥ व्याख्या-चउपचाइनो' ति चत्तारि पचवा, तंजहा-मिगत्तपथमो, भस्सममपञ्चमओ कसायपथमओ, जोमपचओ इति । मिच्छत्तं सामनेणं एगप्पगारं, विभागो अणेगविहं, एगंतामिच्छत्त, वेणइतमिच्छत्तं, संसयमितं, मूढमिच्छत्तं, विवरीयमिच्छत्तमिति । महवा किरियावाभो, अकिरियावाओ, वेणश्यवाओ, अन्नाणवाओ य । " असियसय किरिवापां भकिरियवाईण जाण चुलसीई । अन्नाणि य सत्तही वेणइयाणं च बत्तीसं ॥१॥" अहषा “जावइया पयवाया तवाया चेव होति परसमया । जावडया परसमया तावइया चेव मिच्छत्ता। १॥" पगंतवामो मिच्छत्तं ति एए कम्मबंधस्स कारणभूभा। असंजमो अणेगपगारो हिमाद, अहवा चक्लुइंन्दियविसवाऽमिलासाइ । कसाया पणुवीसाविहा तंजहा-सोलसकसाया, नव नोकसाया इति । जोगा पंचदसप्पगारा पुवं वक्वाणिया । एत्य आहारपद्गवज्जिाहिं चाहिंवि सविगप्पेहि मिच्छहि ट्ठीम्मि बंधो 'उपरिमतिनं तिपचदगो 'त्ति उवरिमतिगं सासाणो सम्मामिच्छो मस्संजयसम्मट्ठिी त्ति एएमु तिसु मिच्छत्तपचयवजिएहि मेसतिगेहि सविगप्पहिं आहारगदुगवजिहि बन्धो भवा, सम्वेषि तेमु मस्थि त्ति काउं, णवरि मिस्स कम्मइगजोगो व सम्मामिच्छे णत्यि, अणन्ताणुबन्धिणो उवारमयुगे णस्थि । 'मीसग बिइमो उवरिमदुगं च देमेक्कदेसम्मि' त्ति विइओ पञ्चो भसंजमो सो देमविरइम्मि मिस्सो-अप्पडिपुग्नो, देसओ विरमणभावाओ, उवरिमद्गं णाम कसायजोगा पए दोनिवि सविगप्पा देसविरयस्त बन्धकारणाणि,णवरि अप्पचक्वाणावरणओरालिबमिस्स (वेउब्बिय) वेउब्विय मिस्सकम्मइगाहारगद्गजियाणि देसविरए पसिं उदभो त्यि त्ति काउं, ॥ १४॥ उवरिलपंचके पुण द पचओ जोगपच्चओ तिण्डं । सामन्नपच्चया खलु अट्ठण्डं होन्ति कम्माणं ॥१५॥ व्याख्या-उवाग्लुपंचके पुण दु पञ्चभो 'त्ति पमत्ताई जाव मुहुमरागो त्ति एण्मु पंचसु कसायजोगपश्चाइगो बंधो, विससोऽत्य भण्णइ, पमत्तस्स कसाया संजलणा, णोकसाया नव एए तेरस, जोगा पुबुत्ता तेरस, पपहिं बन्धो । अप्पमत्तस्सवि ते चेब, णवरि वेब्बियमिस्माहारयमिस्सवजिया एकारस जोगा, तेहिं वन्धो । अपुञ्चाणाव पए चेव, णवरि ||१२|1

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