Book Title: Shatak Prakaranam
Author(s): Veer Samaj
Publisher: Veer Samaj

View full book text
Previous | Next

Page 30
________________ शनक पणि ॥१४॥ उम्मग्गदेसओ मम्गनासो गूढहिययमाइलो। सढसीलो य ससालो तिरिया बन्धए जीवो ॥२१॥ व्याख्या-'उम्मग्गदेसओ' त्ति उम्मगं पनवेद, मम्गस्थियाणं णासणं करेछ, 'गूढहिययमाईष्ठो' ति मणसा गूढो, किरियाए माइलो, सबसलो णाम याचा मधुरो, 'ससलो' ति क्यसीलेमु अइयारसहिमो मायावी जालोप क्ति, पढविमेयसरिसरोसो. मप्पारम्भो, तिरियाउयं कम्मं बाधा ॥२१॥ याणि मणुभाउगस्त मना पपईअ तणुकसायो दाणरओ सीलसंजमविहूणो। मज्झिमगुणेहि सुलो मणुयाउं बन्धए-जीको ॥२२॥ व्याख्या-'पर्या तणुकसायो' ति पर अप्पकसानो, पगईए भइम्मे, पगईए विणीयो, जहि सहि वा दाणरमो, वालुकराइसरिसरोसो, सीबसंजमरहिमो, 'मग्जिमगुणेहि जुत्तों' ति पाइसंकिलिडो, ण विसुखो, उज्जु, उज्जुकम्मसमाचारो, मणुमाउगं कर्म बन्धा ॥२२॥ याणि देखाउमस्स पञ्चमी मन्त्रा-- अणुवयमहत्वएहि य बालतवाकामनिज्जराए या देवाज्यं निबन्धह सम्मट्टिी उ जो जीवो ॥२३॥ व्याख्या--' अणुवयमहन्वयपाहिं' त्ति अणुचयगहणेणं पंचणुव्वयघरो, सत्तसिक्वाणिरओ सावगो । महब्बयगहणेण उज्जीवनिकायसंजमरओ, तबणियमबम्भचारी, सरागसंजओ। 'बालतव' ति अणहिगयजीवाजीवा, अणुवलसम्मावा, अन्नाणकयमंजमा, मिच्छद्दिद्विणो गहिया । 'अकामणिजराए यत्ति अकामतण्हाप, अकामच्छुहाए, अकामबंभचेरेणं, अकामसेयजलपरियावणय ए, चारगणिरोहवन्धणाईया, दीहकालरोगिणो य, असंकिलिट्ठा, उदगराइसरिसरोसा, तरुवरसिखरणिधाइणो, अणसणजलजलणपवेसिणो य गहिया, 'देवाउगं णियन्धन्ति' एए सब्वे देवाउगं कम्म बन्धन्ति । 'सम्मदिटी जो जीवो' त्ति तिरियमणुया अविराहियमम्मदसणा अविरयावि देवाउगं णिबन्धति ॥ २३ ॥ इयाणि णामस्स पञ्चया भन्नन्ति. मगवयणकायको माइलो गारवेहि पडिवद्धो । अमुह बन्धड़ कर्म नपडिवक्खेहि मुहनाम ॥२४॥ ॥१४॥

Loading...

Page Navigation
1 ... 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104