Book Title: Shastravartta Samucchaya
Author(s): Haribhadrasuri, Hargovinddas Pandit
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 16
________________ प्रस्ता शा. स.INञ्चक्रिरे, थैर्लोचनगोचरसंचारिभिः कर्तृणां कृत्स्नविषयव्यापकं महत्त्वख्यापकं च पाण्डित्यं स्वयं पर्यचैषुः, परिचिन्वन्ति, परिचेष्यन्ति च तदवगाहन कृतश्रमा इति नात्र बहु वक्तव्यमस्माकम् ; येषु सांप्रतमपि मुद्रिताकारेण लिखितादर्शरूपेण वामी उपलभ्यन्ते॥४॥ (१) अध्यात्ममतपरीक्षा सटीका (२) अध्यात्मसारः (३) अध्यात्मोपनिषत् (४) अष्टसहस्रीविवरणम् (५) आध्यात्मिकमतखण्डनं सटीकम् (६) उपदेशरहस्यं सवृत्ति (७) कर्मप्रकृतिटीका (८) गुरुतत्त्वनिर्णयः सटीकः (९) जैनतर्कपरिभाषा (१०) ज्ञानबिन्दुः (११) ज्ञानसारः (१२) देवधर्मपरीक्षा (१३) द्वात्रिंशद्वात्रिंशिका (१४) नयप्रदीपः (१५) नयरहस्यम् (१६) सटीको नयोपदेशः (१७) न्यायखण्डनखण्डखाद्यम् (१८) न्यायालोकः (१९) प्रतिमाशतकं सवृत्तिकम्(२०) भाषारहस्य टीकासहितम् (२१) मार्गपरिशुद्धिः (२२) यतिलक्षणसमुच्चयः (२३) वैराग्यकल्पलता (२४) षोडशकवृत्तिः (२५) सामाचारीप्रकरणम् अनुपलभ्यमाना अपि सांप्रतम् , अस्यामेव टीकायां स्वकर्तृकत्वेन प्रत्यभिज्ञायमानाः, इतस्ततः श्रूयमाणा वैते;(१) अध्यात्मोपदेशः (२) अनेकान्तमतव्यवस्था (३) आत्मख्यातिः (४) चतुर्विशतिजिनस्तुतिः (५) छन्दश्चूडामणिटीका (६) ज्ञानसारचूर्णिः (७) ज्ञानार्णवः - (८) तत्त्वविवेकः (९) त्रिसूत्र्यालोकविधिः (१०) पातञ्जलयोगसूत्रचतुर्थपादवृत्तिः (११) प्रमाणरहस्यम् (१२) मङ्गलवादः (१३) मार्गशुद्धिपूर्वार्धम् (१४-१५) लताद्वयम् (१६) विचारबिन्दुः (१७) विधिवादः (१८) शठप्रकरणम् (१९) सिद्धान्ततर्कपरिष्कारः (२०) स्याद्वादरहस्यम् -UMARRESPERMENDOREA ॥४॥ in Education International For Private & Personel Use Only Mainelibrary.org

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