Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 15
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala

View full book text
Previous | Next

Page 332
________________ // 60 // // 61 // // 62 // // 63 // // 64 // // 65 // सम्माइचउसु तिगचउभावा चउपणुवसामगुवसंते / चउ खीणापुव्वे तिनि सेसगुणट्ठाणगेगजिए धम्माधम्मनभा तिन्नि दव्वदेसप्पएसओ तिविहा। . गइठाणवगाहगुणा अरूविणो कालसमओ य सो वत्तणाइलिंगो रूविअजीवा उ हुंति मे चउरो। खंधादेसपएसा केवलअणवो य ते य पुणो - वनाइगुणा बंधाइकारणं इय अजीवचउदसगं। सव्वे वि ह परिणामे भावे खंधा उदइए वि मोहे कोडाकोडी (उ) सत्तरी वीस नामगोयाणं / तीसयराण चउण्हं तित्तीसयराइं आउस्स / मुत्तुमकसाय हस्सा ठिइवेयणियस्स बारसमुहुत्ता / अट्ठट्ठ नामगोयाण सेसयाणं मुहुत्तंतो तीसं कोडाकोडी असायआवरणअंतरायाणं / मिच्छे सत्तरिमित्थीमणुदुगसायाण पन्नरसं * संघयणे संठाणे पढमे दस उवरिमेसु दुगवुड्डी। चालीस कसाएसुं अट्ठारस विगलसुहमतिगे दस दस सुक्किलमहुराण सुरभिनिद्धण्ह मिउलहूणं च / अड्डाइज्जपवुड्डा ते हालिदंबिलाईणं . हासरइपुरिसउच्चे सुभखगइथिराइछक्कदेवदुगे। . दस सेसाणं वीसा एवइयाबाहवाससया अंतोकोडाकोडी तित्थाहाराण जिट्ठठिइबंधो / अंतमुहुत्तमबाहा इयरो संखिज्जगुणहीणो तित्तीसुदही सुरनारयाउ नरतिरियाउ पल्लतिगं। . निरुवक्कमाण छमासा अबाह सेसाण भवतंसो . . . 323 // 66 // // 67 // // 68 // // 69 // // 70 // // 71 //


Page Navigation
1 ... 330 331 332 333 334 335 336 337 338 339 340 341 342 343 344 345 346 347 348