Book Title: Madras aur Maisur Prant ke Prachin Jain Smarak
Author(s): Mulchand Kishandas Kapadia
Publisher: Mulchand Kisandas Kapadia

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Page 362
________________ anwww.. प्राचीन जैन स्मारक। ता. हिदियर । (४) नं० २८ सन् १४ १ ० धर्मचूरामें पुलिस चौकीके सामने । विजयनगरके बोरदेव महाराजके राज्यमें, गोप चामुप निगुडालके पहाड़ी किले में राज्य करते थे । यह मिन शासनका समुद्र था। (आगेका लेख नहीं है ) (२७) कुग प्रांत। यह दक्षिण भारतमें एक छोटा वृटिश प्रांत है जहां १५८२ वर्गमील स्थान है । इसकी चौहद्दी है-उत्तर पूर्व हासन और मैसूर, दक्षिण पश्चिम मलावार और दक्षिण कनड़ा । इतिहास-नौमी और १० मी शतानीके लेखोंसे प्रगट है कि यह गंगवंशमें शामिल था जिसने दूसरीसे ११ वीं शताब्दो तक मैसूरने राज्य किया था। चंगल्यवंशी राजा-ये गंगवंशी राजाओंके आधीन चंगनादके राजा थे गे पीछेसे नंनराय पाटनके राजा अपनेको कहते थे । यह स्थान कुर्गमें कावेरीके उत्तर है । ये पहले पहल कावेरीके दक्षिण येडाटोर और मेहरमें मिलते हैं। इनका देश मैसूरका हुनमृर ता० व कुगका उत्तर व पूर्व भाग था। इनके शिलालेख येदवनाद तथा वेदियतनादमें पाए गए हैं। ये मूलमें जैनी थे। इनके आचार्य हेनसोगेसे तलकावरी तक जैन मंदिरोंपर स्वतंत्र अधिकार रखते थे They were originally Jains. 1 ११ वीं शताब्दीमें इनमें नन्निचंगल्वराजेन्द्रचोल बहुत प्रसिद्ध राजा होगया है । १२ वीं शताब्दीमें इन्होंने अपना धर्म जैनसे लिंगायत कर लिया। कोंग

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