Book Title: Kriya Kalap
Author(s): Pannalal Shastri
Publisher: Pannalal Shastri

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Page 318
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Ah Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir लघुभक्तयः। wwwwwwwwwwww तवसिद्धे णयसिद्धे संजमसिद्धे चरित्तसिद्धे य । णाणम्मि दंसणम्मि य सिद्धे सिरसा णमसामि ॥९॥ अंचलिकाइच्छामि भंते ! सिद्धभत्तिकाओसग्गो को तस्सालोउं, सम्मणाण-सम्मदंसण-सम्मचरित्तजुत्ताणं अहविहकम्मविप्पमुक्काणं अहगुणसंपण्णाणं उड्ढलोयमत्थयम्मि पहियाणं तवसिद्धाणं णयसिद्धाणं संजमसिद्धाण चरित्तसिद्धाणं तीदाणागदवमाणकालत्तयसिद्धाणं सव्वसिद्धाणं णिचकालं अचेमि पूजेमि वंदामि णमंसामि दुक्खक्खओ कम्मक्खओ बोहिलाहो सुगइगमणं समाहिमरणं जिणगुणसंपत्ति होउ मज्झं । लघश्रुतमक्तिः अर्हद्वक्त्रप्रसूतं गणधररचितं द्वादशांगं विशालं चित्रं बढर्थयुक्तं मुनिगणवृषभैर्धारितं बुद्धिमद्भिः। मोक्षारद्वारभूतं व्रतचरणफल ज्ञेयभावप्रदीप भक्त्या नित्यं प्रवन्दे श्रुतमहमखिलं सर्वलोकैकसारम् ॥१॥ जिनेन्द्रवक्त्रप्रतिनिर्गतं वचो यतीन्द्रभूतिप्रमुखैर्गणाधिपः। . श्रुतं धृतं तैश्च पुनः प्रकाशित द्विपद्प्रकारं प्रणमाम्यहं श्रुतम् ॥२॥ For Private And Personal Use Only

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