Book Title: Kriya Kalap
Author(s): Pannalal Shastri
Publisher: Pannalal Shastri
View full book text
________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
क्रिया-कलापे
AAAAAAAAAAAAA
लघुभक्तयः।
लघुसिद्धभक्तिः ।
संसारचक्रगमनागतिविप्रमुक्ता
नित्यं जरामरणजन्मविकारहीनान् । देवेन्द्रदानवगणैरभिपूज्यमानान्
सिद्धांस्त्रिलोकमहितान् शरणं प्रपद्ये ॥ १ ॥ असरीरा जीवघणा उवजुत्ता दसणे य णाणे य । सायारमणायारा लक्खणमेयं तु सिद्धाणं ॥२॥ मूलुत्तरपयडीणं बंधोदयसत्तकम्मउम्मुक्का । मंगलभूदा सिद्धा अहगुणातीदसंसारा ॥३॥ अहविहकम्मवियडा सीदीभूदा णिरंजणा णिच्चा । अहगुणा किदकिच्चा लोयग्गणिवासिणो सिद्धा ॥४॥ सिद्धा हमला दिसुद्धबुद्धीय लद्धसब्भावा । तिहुवणसिरसेहरया पसियंतु भडारया सव्वे ।। ५॥ गमणागमणविमुक्के विहडियकम्मदृपयडिसंघाए । सासहसुहसंपत्ते ते सिद्धे वंदिमो णिच्चं ॥ ६ ॥ जय मंगलमूदाणं विमलाणं णाणदंसणमयाण । तहलोयसेहराणं णमो सया सव्वसिद्धाणं ॥७॥ सम्मत्त-णाण-दसण-वीरिय-सुहुमं तहेव अवगहणं । अगुरुलहुमव्वावाई अडगुणा होति सिद्धाणं ॥८॥
For Private And Personal Use Only

Page Navigation
1 ... 315 316 317 318 319 320 321 322 323 324 325 326 327 328 329 330 331 332 333 334 335 336 337 338 339 340 341 342 343 344 345 346 347 348 349 350 351 352 353 354 355 356 357 358