Book Title: Kriya Kalap
Author(s): Pannalal Shastri
Publisher: Pannalal Shastri
View full book text
________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
३०२
www.kobatirth.org
क्रिया-कलापे
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
कोटीशतं द्वादश चैव कोट्यो लक्षाण्यशीतिस्त्र्यधिकानि चैव । पंचाशदष्टौ च सहस्रसंख्य-मेतच्छ्रुतं पंचपदं नमामि ॥३॥
अरहन्तभासियत्थं गणधरदेवेहिं गंधियं सम्भं । पणमामि भत्तिजुत्तो सुदणाणमहोहिं सिरसा ॥४॥ अंचलिका
इच्छामि भंते ! सुदभक्तिकाओल्सग्गो कओ तस्सालोचेउं, अंगोवंगपइन्नयपाहुड परियम्म सुत्तपढमानिओयपुव्वगयचुलिया चेव सुत्तत्थयथुइधम्मक हाइयं सुदं णिच्चकालं अंचेमि पूजेमि वंदामि मसामि दुक्खक्खओ कम्मक्खओ बोहिलाहो सुगइगमण समाहिमरणं जिणगुणसंपत्ति होउ मज्झं ।
eyerfestati
समुदयमूलः संयमस्कन्धबन्धो
यम नियमपयोभिर्वर्धितः शीलशाखः । समितिकलिकभारो गुप्तिगुप्तप्रवालो
गुणकुसुमसुगन्धिः सत्तपश्चित्रपत्रः ॥ १ ॥
^^^^^^^^^^n
शिवसुखफलदायी यो दयाछाययोद्यः
शुभजन पथिकानां खेदनोदे समर्थः । दुरितरविजतापं प्रापयन्नन्तभावं
For Private And Personal Use Only
सभवविभवान्यै नोऽस्तु चारित्रवृक्षः ||२||

Page Navigation
1 ... 317 318 319 320 321 322 323 324 325 326 327 328 329 330 331 332 333 334 335 336 337 338 339 340 341 342 343 344 345 346 347 348 349 350 351 352 353 354 355 356 357 358