Book Title: Jain Dharm Prakash 1952 Pustak 068 Ank 05
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 3
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra પુસ્તક ૬૮ મ ५४.५ www.kobatirth.org नैन धर्म प्रकाश Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir : शष्णु : मरुदेवी - मोहविलसित । ( कवि - साहित्यचन्द्र बालचंद हिराचंद, माळेगाव ) बोलो कोई बतलावोजी ऋषभ कहां है मेरा जीवन ? जंगल में वह फिरता होगा भूखतृषा से पीडित होगा अन्न वस्त्र जल उसे कहां से कौन खिलाये सुंदर भोजन ? बोलो कोई बतलावोजी ऋषभ कहां है मेरा जीवन ? ॥ १ ॥ वस्त्र उसे कोई मिले कहां से ? सोना उसको नित्य धरा से વીર સ, ૨૪૯૮ वि.सं. २००८ गर्मी सरदी पीडा होंगी निद्रा कैसे कहां मिलेंगी ? मैं हूं माता दुखिनी उसकी दुःखों की मैं हो गई भाजन बोलो कोई बतलावोजी ऋषभ कहां है मेरा जीवन ? ॥ २ ॥ For Private And Personal Use Only कहो कोई संदेश ऋषभ का मेरा बनकर बंधु साजन बोलो कोई बतलावोजी ऋषभ कहां है मेरा जीवन १ ॥ ३ ॥

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