Book Title: Epigraphia Indica Vol 21
Author(s): Hirananda Shastri
Publisher: Archaeological Survey of India
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276 EPIGRAPHIA INDICA."
[Vol. XXI. 67 लपुष्ट मोचि जंमुल मींदंगा दूर्ये दक्षिणमिचि तूर्पसागि नलंज68 ट तिप्प पेहपुटवोहि जम्मि मोचि उत्तरमै गारपुट्टल मींदंगा बुलुवुडं- . . 69 बुट मोचि तृर्य अगंटल मींदंगा बेदपूंडि पालपाटि संदु 70 चवुटगंट पडुमट नेडगलगोनपुट मोचि जम्मि मींद दक्षिणं सागि जम्मि71 पुट्ट मोचि तूर्षे [प]द डि पालपाटि संदु चौडु मोचि दक्षिणमिचि गोल72 कुंट तूर्युनतुंडि चालुपुटल मींदं दूर्घ सागि वडंगिगुट मो73 चेनु ॥ एतेषां मध्यवर्तित्रं ॥ सदत्वादिगुिणं एवं पदालानुपा
Fifth Plate, Second Site. 74 लनं परदत्तापहारण खदात निष्पा भवन् [*191] स्वदतां वरदत्तां 75 वा यो हरेत वसुंध(धोरां । षष्टि वर्षसहस्राणि विछायाँ 76 जायते क्रिमिः ॥[200"] एकैव भगिनी लोक सर्वेषामपि समुजां' 77 न बी(भी)म्या न करपाया विप्रदत्ता वसंघ(ध)रा 1[1*211] अनवमनरें78 ट्रस्य विहान् बालसरखती । प्रकरोदाकरो वाचा विमल] 79 धर्मवासन ["] मंगळमहावी[:] बी श्री 80 श्रीपशवत्रिणेन []
TEXT. 1 दांकां बोयि मगुडि उत्तरपमुखमै अडुगुलकर बहि वच्चि रेमंबडिय 2 दापुन मूल मुत्तलनुडि देशसुडौंबकु वञ्चि कुनि पडमटिकि दिगि बंदु3 दापुन मगुडि उत्तरानकुं बोयि देशमुकुट तूर्पुन मगुडि तूपुं4 मुखमै कुनि पञ्चावलपलपु नेल तिरिगि दक्षिणानकु नडचि कुनि तम्मङि
वह दधि6 णान वोरसि उत्तराभिमुखमै पोयि कुनि तूर्पमुखमै नडचि गरुवु येकि तूप 6 नडचि कुनि दक्षिणमुखमै कुनि तूर्पमुखमै ईदुपडुव नडुमुवष्टि नडचि ग7 रुवुन मगुडि दक्षिणमुखमे वच्चि यथास्थानान गूडनु ॥ दाता कोमटिवेम8 नाम नृपतिः पावं गुरुः मंकरः स्वानं चेत्पिनपाडुरत्र तु कविः श्रीनाथ
भहारकः । 0 कालवेच्छिवराविपुख्यसमयः साक्षी महान् श्रीगिरिः श्रेयः किं न तु वर्यते सुक10 विभिः सखंत तच्छासनं ."[11"] सर्वमान्यवतधर्मशासनं पालयतु भवि भाविपार्थि11 वाः । अपहारपरिरक्षणादृते नास्ति नास्ति हि यशो महीपत fun'] अदत्तावि(हि)गुणं
JMetre: AnwakjubA. • Metre Sardalavikriditam,
* The anuaire is written to the next line • Metre Rathoddhad.

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