Book Title: Anuyogadwara Sutra
Author(s): Aryarakshit,
Publisher: Sujalpur
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स-समावश्करीमायामाभावावसी ततेविहुँनेविषम समाववेकरीश्रावाससनरविषसासारवासनवि कानेविस-समावर
वर
वरियायसम्मायारणंसमोरारतभयसम्मायारणंभारगुपाए ससमारी
समजा निगमगेना-सागरायमावेति -तविलुानतीवरंस-समबतारकरीक्षारोपभने हासोमसमयतारकरीयाशापणकायमानः
विधासम्वतरइसमाई एसामायर एवंजावसागराचामसामायहरतरभयसग्मायारेगंडा
समावई या-मासनामारोपनए.एम.उसम्रिगी लावसर्पिणी उगलावताना नेविष
- विवेपूरसर्विएशतपो पुगवप्राव तिनकालनेति नविषमायनेउसमतानविवरमाय पंडममारे नेत्र
श्री सप्पिणीसम्मायरायभायएवंउसपिरिणापासपरियभूनी तिनकालतानागतकाजविवहनामारयतितमानमः। सर्वकानवियपसमावापा-यालभावनामपरणाबने अतितमाम का-कावसमवतारे त अर्णकि कारण
नानावसमाताररसमाही विषापासमावास-वर्ष अहसबहाएसमायरायभावयासतकालसामायारम्सतिंभ
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