Book Title: Anusandhan 1995 00 SrNo 05
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 79
________________ (७२) __ मारवाडमा होदड जोषीने सौ मूरत पूछे अने एनी पासे जोश जोवरावे. हवे एक खेडूते खेतरमा उंचाणवाळा भागमां वाल वाव्या अने मांडवा बांधी ते पर वेला चडाव्या. राते ऊंट आवीने वालोळना वेला खाई जतां. खेडूते होदड जोशीने पूछ्युं, मांडवानी उपर चडेला वेला कोण खाई जाय छे ? डहापणना भंडार होदडे आंखो बंध करी ध्यान धरीने खुलासो कर्यो : खांडणिया उपर चडीने ससलुं तमारा वेला खाई जाय छे. माटे खेतर पासे तेम ज सीममां राते जईने पडकार करो के जे ससला ऊखळा पर चडीने अमारा खेतरतुं वावेतर खावा राते आवशे तेमने जीवता नहीं मूकीए. गामलोको होदडना ज्ञानथी राजीराजी थई गया. वाड पासे पडकार करता खेडूत चोकी करवा लाग्या. वेला खवाता बंध थया. 'ओक्खलि पग चडाविया वल्लखद्धद् ससएण। किमु थासि मरु बप्पडी, होदडएण मुखेण। (होदड जोशीए जोश जोईने कह्यु, 'ऊखळा पर पगे चडीने ससलाए वाल खाधा छे.' आ होदड मरी जशे त्यारे बापडी मारवाडनु शुं थशे ? ) आ वांचतां आपणी एक जाणीती लोककथा याद आवशे. देडका नीकळ्यो ते जोईने मूरख गामलोकोए 'आ कयुं प्राणी छे ?' ते गामना डाह्या डोसाने पूछ्युं. डोसाए आंख पर हाथथी छाजली करी नीचे वळीने जोतां कडं, 'नाखोने चपटी दाणा, चणे तो चकलुं नहीं तो मोर'. आ बन्ने कथाओ थोडाक विगतेफेरे हिन्दीभाषी प्रदेशमा लोककथा तरीके जाणीती छे. पहेली- मर्मनिर्देशक पद्य छ : "एक जाणे लाल भुजक्कड, और न जाने कोई, पैर पे पैयां चक्की बांध के, हिरन कुदा होइ.' बीजीनी मार्मिक उक्ति छे : 'दाने डालो, चुग लेगा सो तोता, न चुग ले सो तोती'. ५. अक्कलना ओथमीर ___ मलधारी राजशेखरसूरि कृत 'विनोदकथा-संग्रह' (रचनासमय ईसवी चौदमी शताब्दी)नी ७९मी कथा(पृ. ६८ थी ६९)नो अनुवाद नीचे प्रमाणे छे : Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110