Book Title: Anusandhan 1995 00 SrNo 05
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 88
________________ ( ८१ ) ७. प्रयोगोनी पगदंडी १. 'सीझवुं' के 'सीजवुं' ? १. कोशोमां सीझवुनो अर्थ 'धीमे तापे बराबर बफाइ के चडीने तैयार थवुं - रंधाई रहेवुं' ए प्रमाणे आप्यो छे. जेम के 'भातने सीझवा देवा'. सं. सिध्यति, प्रा. सिज्झइ अने पछी सीझे ए प्रमाणे व्युत्पत्ति आपेल छे. २. आमां एक मुश्केली ए छे के संस्कृत अने प्राकृत शब्दोनो अर्थ तो सामान्यपणे 'सिद्ध थवुं', 'रंधावुं' एवो छे, नहीं के 'धीमे तापे रंधावुं'. अन्य भारतीय भाषाओमां आ शब्दनी साथे संकळायेला शब्दो जोतां शब्दनुं स्वरूप अने मूळ फेरतपास मागे छे. ३. टर्नरना भारतीय-आर्य भाषाओना तुलनात्मक कोशमां क्रमांक १३९३३ (स्विघति ) अने १३९३४ (स्विन्न) नीचे जे माहिती आपी छे, तेथी आ प्रश्न पर प्रकाश पाडे छे. पालि सिज्जिति ऊकळे छे', हिन्दी सीजना 'धीमे तापे ऊकळवु; पालि सिन्न ऊकळेलुं'; काश्मीरी सेनदुन 'सीझववुं'. ४. एटले स्वेदन 'परसेवो वळे तेम करवुं', 'वराळ निकळे तेम करवुं' ए अर्थने ध्यानमां लेतां सं. स्विद्यति, प्रा. सज्जइ उपरथी गुजराती सीजे (नहीं के सिझे ) धीमे तापे रंधावाना अर्थमां निष्पन्न थयेल छे. आनुं समर्थन जूनी गुजराती सिन्न वडे थाय छे. 'वर्णकसमुच्चय मां (पृ. १७४) वडाना वर्णनमां कह्युं छे : 'घणइ तेलिं सीना' एटले के भरपूर तेलमां धीमे तापे तळ्यां'. सं. स्विन्न प्रा. सिन्न गुजराती सीनं. सौराष्ट्रमां भातने 'सीजवा देवा' ओम बोलाय छे. . ५. 'रांध्यंसीध्यं 'मां ए पर्यायसमासमां 'सीधवं' मळे छे. 'वर्णकसमुच्चय 'मां (पृ.१७३) 'कुघरणी 'ना वर्णकमां 'रांधणां सीधणा नितु अणाहर (अणादर ? ) करइ '. (पृ. १४३). २. 'सूनासणा' 'अनुसंधान' - १मां (पृ. १८ - १९) जूनी गुजराती सूनासणा अने अपभ्रंश सुण्णासण शब्द 'असवाररहित, सूनी बेठकवाळा' उपर नोंध छे. एक वधु प्रयोग जूनी गुजरातीमां मळता रूढ वर्णकोमांथी ध्यानमां आव्यो. तेमां युद्धना वर्णनमां 'सूनासणा Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110