Book Title: Amar Kshanikaye
Author(s): Amarmuni
Publisher: Sugal and Damani Chennai

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Page 53
________________ दीक्षा दीक्षा का पथ असिधारा है, विरले ही चल पाते हैं। जो चलते हैं आत्म देव के दर्शन वे कर पाते हैं ।। कब का सोया अन्दर में वह देव, जगाना है उस को । धन्य धन्य वह, दीक्षा की यह अर्थ-चेतना है जिसको ।। 90 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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