Book Title: Vruttajatisamucchaya
Author(s): H D Velankar
Publisher: Rajasthan Prachyavidya Pratishtan

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Page 161
________________ सैदणपुरी संदाणिअअविसेसस सअण्णआण रसिए सउरंगमए सबाणए सक्करिअइसक्करिया सत्तावीसा हारा सत्तिदंडकरवाल सत्तिदंडबाणाण सतुरंगरहस्स देसु पुरओ कमेण सतुरंगरहस्स देसु पुरओ णिअमेण सतुरंगरहो समरं समोत्ति अ समे सललिअगमणे पिए सविअप्पउणं काऊण सविअप्पेणुव्वणिए सव्वंतमझगरुओ सवाणं चिअ गलिआण सव्वाणं पत्थारं सटीको वृतजातिसमुन्धयः 3.13। सन्वासु छंदजाईसु 1-11 सव्वे पुव्वविअप्पा 3.19 ससद्दणेउरं 4.21 साअरए गइंदओ . 6.5 साअरपाअघडिअ 4.3 साअरवण्णे अंका 4.89 सामण्णेहिं पउंजइ 3.27 सामुग्णअजमएणं 3.35 सामुग्गअंति णामेण 4.17 सुइसुहाई विणिएप्पिणु 3.2 सुमना तारा ज्योत्स्ना 1.32 सुविअट्ठकईण सुहा 4.46 सूईमेरुवडाआ 6.39 हंसी. पच्छा रइआ 6.40 हरिहरिणहत्थि 1.15 हाररसाण जुअस्स जुए 4.106 हाररसाण तिमि 1.12 . हाररसाण पिए 4.107 6.52 4.59 3:54 4.81 6.12 1.22 4.103 4.95 4.32 2.10 3-20 6.6 2.12 4.12 3.34 4.22 3.32 V. INDEX OF QUOTATIONS IN COMMENTARY अतः स आएन्दुसि नर्कुटकः on 4:25. । तानाप्तेभ्यो नाना on 1.1. अन्यो वर्णो हलु संनिवा(धौ)? on 1.13, द्वाभ्यां समहता संख्या on 6.60 .. p. 5,1. 10. = Jayevachandas VIII. 12. अपत्यस्य च जातस्य on 4.108. नत्वा पिङ्गलसैतव on 1.1. एतैर्निजासित on 1.1. पुस्तकलेखकदोषात् on 1,1. तक्खणण्हाणमणहरे on 1.13. विस्तारो वस्तुकस्यार्ध on 2.6.

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