Book Title: Sugandhdashmi Katha
Author(s): Hiralal Jain
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 120
________________ परिशिष्ट ३ विद्वज्जुगुप्सायां श्रावकसुताउदाहरणम् । हरिभद्र-श्रावकाननि टीका ( गा० ६३) ( लगभग सन ७५० ई० ) विद्वज्जुगुप्सायां श्रावकसुता-उदाहरणे-एगो सेहो पर्वते बल्लई । तस्स धूयाविवाहे कह थि साहुणा आगया । सा पिउणा भणिया--पुत्तिए पडिलाभेहि साहुणो। सा मंडियपसाहिया पहिलाभेइ । साहूण जल्लगंधो तीए आघातो। सा चिंतेइ-अहो अणवज्जो भट्टारगेहि धम्मो देसिओ। जइ पुण फासुपण पाणीपण आहाएज्जा, को दोसो होजा ? सा तस्स हाणस्स अणालोइय अप्पडिक्कना कालं काऊगं गाय गिहे गणियापार समुष्पन्ना। गभगया चेव अरई जणेइ । गभसाउणेहि य ण सउद । जाया समाणी उझिया ? सा गंधेण तं वनं वासेइ । सेणिओ तेण पदेसेण णिग्गच्छद सामिणो बंदिउँ। सो खंधावारो तीए गंध ण सहइ । रना पुच्छियं किं एयं । तेहिं कहियं दारियाए. गंधो। गंतूणं दिवा। भणइ एस एब पढमपुच्छ त्ति गओ। बंदित्ता पुन्छइ । तओ भगवया तीए उट्ठाण-परियावणिया कहिया । तओ राया भणइकहिं एसा पच्चणुभविश्सई सुहं या दुक्खं वा। सामी भणइ-एएण कालेण वेइयं । इयाणि सा तव चेव भजा भविस्मइ अगामहिसी । अह संबच्छराणि जाव तुभ रममाणम्ल पट्ठीए साज लीलं काहिइ तं जाणिजसु | बंदित्ता गओ। सा य अयगयगंधा आहीरेण गहिया संवडिदया जोवणत्था जाया। कोमुइचार मायाए समं आगया। अभी से णिओ य पच्छन्ना कोमुइचार पेच्छति । तीए दारियाए अंगफासेण सेणिओ अज्झोवकन्नो नाममुहिया तीए बंधइ । अभयस्स कहियं नाममुद्दा हरिया मग्गाहि । तेण मणुस्सा दारेहि बद्धेहिं ठविया । एकेक माणुस्सं पलोएऊण णीणिजइ। सा दारिया दिट्ठा। चोरि ति गहिया परिणीया य । अन्नया वस्सोकण रमंति । राएणं राणियाउ पोतेण वाहिति । इयरी पोत्तं दाउं विलम्गा। रन्ना सरियं मुक्का य पबना।

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