Book Title: Sugandhdashmi Katha
Author(s): Hiralal Jain
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 159
________________ २२ जिनसागरकृत लागी रू. पिलिसि माझी नालारासि घरेगुलंगोटियाहा प्रियेकन्यका दोनिनीज मुझी आ हुई रूपाने सोया कसाला वादाचये गेली अतिकाळजाला मूलाजार दीपीयनसी कलेना किनिलागनिष बेरासी दर्या ऐसे बालबिंनित्यादिमा पाठाचानिलाबोक सारमदीया सभोकारमंत्रावरीनवनारी होर्मन सर्वपायानिवारी ७० [ ६८ ३० ३१

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