Book Title: Sugandhdashmi Katha
Author(s): Hiralal Jain
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 163
________________ * जिनसागरकृत सारा सामिल्या समस्ता न्याबालतिन्यायरी यस्ता १६ कोकिला कोटिं कान्तिबाला कोलिंकुक्षी चाक बोल कान्हा हे वीरताले अर्थ माळीन अईबाई काय म्यां करावें अ कारवि अकसी सुगंध कानगावी बहुतवगुणाचिकाकती धरावी उमेदवच आलाधिदाईमग कोयेवो ये महाकायविपर्यमाले बालासुगंधा [ 195 - ३६

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