Book Title: Subodhika Kalpasutra Tika Gujarati Bhashantar
Author(s): Vinayvijay
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 386
________________ कल्प | पुरोग ॥१३॥ हे आर्य साधु ! तमे ग्रहण करो. ग्लाने नोजन कर्या बाद पक्वान्न श्रादिक जे काश्वधे ते तमे खाजो, उध श्रादिक पीजो.' क्वचित् पाहिसित्तिने बदले दाहिसित्ति जोवामां श्रावे . त्यारे एम अर्य ६ करवो के 'ग्लाने लोजन कर्या बाद जे कांश वधे ते तमे खाजो श्रने बीजाने श्रापजो. एम तेणे ( गृहस्थे ) को उते अधिक खेवू कटपे; पण खाननी निश्राए गृद्धि यी पोताने माटे लेवू कल्पे नहीं. ग्लानने माटे मागी आणेल थाहारादि मंत्रीमा आण नहीं. १७. की चोमासु रहेला साधुग्ने ते प्रकारनां अनिंदनीय घरो जेवां के तेर श्रया बीजार श्रावक करेला होय, प्रत्ययवंत अथवा प्रीति उपजावनारां होय, अपवादानने विषे स्थिरतावाला | होय, निश्चे श्रहीं मने मलशे एवो ज्यां विश्वास होय, ज्यां सर्व यतिनो प्रवेश संमत होय, जेने है घणा साधु संमत (इष्ट ) होय अथवा ज्यां घरनां घणां मनुष्योने साधु संमत होय तया ज्या दाननी आज्ञा द राखी होय अथवा सर्व साधु सरखा बे एम धारीने ज्यां लघु शिष्य पण इष्ट होय, परंतु मुख जोइने टीझुं करातुं न होय तेवां घरने विषे जोती वस्तु अगदी या प्रमाणे कहेवं कल्पे नहीं के 'हे आयुष्मन् ! आ वस्तु ?' एम नहीं जोयेली वस्तुने माटे पूg कहपे नहीं ए अर्थ जाणवो. 'हे जगवन् ! ते शामाटे ?” ए प्रमाणे शिष्ये प्रश्न करवायी गुरू कहे के ना-13 वान् गृहस्थ मूख्य वडे लावे अने जो मूख्य वडे न मले तो घणी श्रमाने लीधे चोरी पण करे.' कृपणना घेर वस्तु अणदीवे पण मागवामां दोष नथी. १ए. . चोमासु रहेला हमेशां एकासणुं करनार साधुने सूत्र पौरुषी कीधा पछी एक वार गोची जवाना काले गृहस्थy घर कल्पे वे एटले जात अने पाणीने अर्थे गृहस्थना घरमांधीनीक है श्रने प्रवेश करवो कल्पे बे, पण बीजी वार कल्पे नहीं. अन्यत्र कहेतां श्राचार्य श्रादिनी वैधा वृत्त्य करनाराउँने वर्जीने ए श्रर्थ बे; ते जो एक वार जोजन करवा वडे वैयावृत्त्य करी न शके तो बे वार पण जोजन करे, कारण के तपश्री वैयावृत्त्य श्रेष्ठ बे. श्राचार्य नी वैयावृत्य करनारा, जपा Recorrowesorrowwws ॥१३॥ Jain Education International For Private sPersonal use Only, www.jainelibrary.org

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