Book Title: Sarva Mangal Manglyam
Author(s): Padmaratnasagar
Publisher: Mahavir Jain Aradhana Kendra Koba
View full book text
________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
"
कंसारी कोलियावडाए; ढींकण विंछु तीड,
भमरा भमरीओ कोता बग खडमांकडीए
एम चौरिंद्रियजीव जे में दुहव्या,
ते मुज मिच्छामि दुक्कडं ए;
जळमां नाखी जाळ, जळचर दुहव्या,
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
१४३
For Private And Personal Use Only
११
वनमां मृग संतापीयाए
पीड्या पंखीजीव, पाडी पासमां,
पोपट घाल्या पांजरे ए;
एम पंचेद्रियजीव, जे में दुहव्या
ते मुजमिच्छामि दुक्कडंए
ढाळ त्रीजी
( वाणी वाणी हितकारीजी - ए देश ) क्रोध लोभ भय हास्यथीजी, बोल्यां वचन असत्य, कूडकरी धन पारकांजी, लीधां जेह अदत्तरे;
जिनजी, मिच्छामि दुक्कडं आज, तुम साखे महाराजरे; जिनजी देइ सारूं काजरे, जिनजी मिच्छआ मि दुक्कडं
आज
१२
१३
१

Page Navigation
1 ... 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159 160 161 162 163 164 165 166 167 168 169 170 171 172 173 174 175 176 177 178 179 180