Book Title: Samansuttam Chayanika
Author(s): Kamalchand Sogani
Publisher: Prakrit Bharti Academy

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Page 179
________________ प्रक । जाविदिया [(जाव)+(इंदिया जावः (म)=जब तक । इंदिया (इंदिय) 1/2 । हायंति (हाय) व 3/2 अक । ताव (म) = तब तक । धम्म (धम्म) 2/1 समायरे (समायर) विधि 3/1 सक'।' 153 दो (दो) 1/2 । चेव (म)=ही। जिनवरेहि (जिणवर) 3/2 । बाइबरामरणविष्पमुक्केहि [ (जाइ)-(जरा)-(मरण)-(विप्पमुक्क) _3/2] । लोगम्मि (लोग) 7/1। पहा (पह) 1/21 भणिया (भण) भूकृ 1/2 | सुस्समण (सुस्समण) मूल शब्द 1/1 । सुसावगो (सुसावग) 1/1 | वावि (अ) = और। 154 वाणं (दाण) 1/1 । पूया (पूया)1/1 । मुक्खं (मुक्ख) 1/1 । सावयषम्मे [(सावय)-(धम्म) 7/1] । " (अ)= नहीं। सावया (सावय) 1/2 । तेण (त) 3/1 स । विणा (प्र) = बिना। झाणाझयणं [(झाण)+ (मज्झयणं)] [(झाण)-(अज्झयण) 1/1] । मुक्खं (मुक्ख) 1/1 वि । जइधम्मे [(जइ)-(धम्म) 7/1] । तं' (त) 2/1 स । विणा (अ)= बिना। तहा (अ) = उसी प्रकार । सो (त) 1/1 सवि । वि (म) =भी। . . 1. 'बिना' के योग में द्वितीया या तृतीया होती है। 155 पाहारोसह-सत्थामय-मेको [(प्राहार)+ (प्रोसह) + (सत्थ) + (अभय) +(भेप्रो) [(प्राहार-(प्रोसह)--(सत्थ)-(प्रभय)-(भेन) 1/1] । . (ज) 1/1 सवि । चउम्विहं (चउन्विह) 1/1 वि । वाणं (दाण) _1/1 तं (त) 1/1 सवि बुच्चई (बुच्चइ) व कर्म 3/1 सक पनि । - वायव्वं (दा) विधिक 1/1 णिहिमुवासयझयणे [(रिणद्दि8)+ उकासय) + (प्रग्झयणे)] [णिद्दिनें (रिणहिट्ठ) भूकृ 1/1 अनि । .. [(उवासय)-(प्रज्झयण) 7/1] । 156 जयना (जयणा) 1/1 | उ (प्र) = निश्चय ही। धम्मजगणी [(धम्म)- (जगणी) 1/1] | धम्मस्स (धम्म) 6/1 । पालगी (पालणी) 1/1 वि । .146 ] [ समणसुत्त Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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