Book Title: Prakrit Vyakaranam Part 1
Author(s): Hemchandracharya, Suresh Sisodiya
Publisher: Agam Ahimsa Samta Evam Prakrit Samsthan

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Page 435
________________ 402 : प्राकृत व्याकरण वि (पाणिनीयाः) पाणिनी ऋषि से संबंधित; २-१४७ न (पानीयम्) पानी, जल; १०१। न (प्रकटम्) प्रकट; १-४४ | वि (प्राकृतम्) स्वाभाविक; १-६७। न (पादपतनम्) पैर में गिरना, प्रणाम विशेष; १-२७०। न (पादपीठम्) पैर रखने का आसन; १-२७० पु (प्राकारः) किला, दुर्ग; १-२६८। न (पातालम्) पाताल, रसा-तल, अधो भुवन १-१८० वि (प्रावारकः) आच्छादक, ढाँकने वाला; १-२७१। वि (परकीयम्) दूसरे से सम्बन्धित; १- ४४, २-१४८ वि. (पारकीयम्) दूसरे से सम्बन्धित; १- ४४ ; २-२७१ स्त्री (पापर्द्धिः) शिकार, मृगया; १-२३५। पारेवओ पु (पारापतः) पक्षि-विशेष, कबूतर; १-८०। पु (प्राकारः) किला, दुर्ग; १-२६८। पु (प्ररोहः) उत्पत्ति, अंकुर; १-४४। न (पाद-पतनम्) पैरो में गिरना, प्रणाम-विशेष; १-२७०। न (पापम्) पाप, अशुभ कर्म, पुद्गल; १-१७७, पवासू पल्लद्रं वि (पर्यस्तम्) क्षिप्त, हत, विक्षिप्त, पतित; २-६८। पाणिणीआ पल्लत्थो वि (पर्यस्तः) क्षिप्त, हत, विक्षिप्त, पतित; २-४७। पल्लत्थं वि (पर्यस्तम्) क्षिप्त, हत, विक्षिप्त, पतित; २-६८। पाणीअं पल्लविल्लेण पु (पल्लवेन) पल्लव से, नूतन पत्ते से; २-१६४। पायडं पल्लाणं न (पर्याणम्) घोड़े आदि का साज सामान; पाययं १-२५२; २-६८। पायवडणं पल्हाओ पु (प्रह्लादः) हिरण्यकश्यप नामक दैत्य का पुत्र; २-७६। पायवीढं पवट्रो वि (प्रवृष्टः) बरसा हुआ; १-१५६। पायारो पवत्तओ वि (प्रवर्तकः) प्रवर्तक, प्रवृति करने वाला; २-३०। पायालं पवत्तणं न (प्रवर्तनम्) प्रवृत्ति; २-३०। पवहो पु (प्रवाहः) प्रवृत्ति, बहाव; १-६८। पारओ पवहेण पु. (प्रवाहेन:) बहाव द्वारा; १-८२। पारकेरं वि (प्रवासिन) मुसाफिरी करने वाला यात्री; १-४४। पारक्वं पवाहो पु (प्रवाहः) प्रवृत्ति; बहाव; १-६८। पवाहेण पु (प्रवाहेन) बहाव द्वारा; १-८२। पारद्वी पवो पु (प्लवः) पूर, उछल-कूद; २-१०६। पारावओ पसढिलं वि (प्रशिथिलम्) विशेष ढीला; १-८९। पसत्थो वि (प्रशस्तः) प्रशंसनीय, श्लाघनीय, श्रेष्ठ; पारो २-४५। पारोहो पसिअ अक (प्रसीद) प्रसन्न हो; १-१०१, २-१९६। पावडणं पसिढिलं वि (प्रशिथिलम्) विशेष ढीला; १-८९। पसिद्धी स्त्री (प्रसिद्धि) १-४४। पसूण न (प्रसून) फूल, पुष्प; १-१६६, १८१। पहरो पु (प्रहारः) मार, प्रहार; १-६८। पावयणं पहिओ पु (पान्थ;) मार्ग में चलने वाला, यात्री, मुसाफिर; पावरणं २-१५२। पावारओ अ. (प्रभृति) प्रारम्भ कर, वहां से शुरू कर, लेकर; पावासओ १-१३१,२०६ पावासू पहो पु (पन्थाः ) मार्ग; १-८८। पावीद (धातु) पीने अर्थ में। पासइ पियइ सक (पिवति) पीता है; १-१८० पासं पाइक्को पु (पदातिः) पांव से चलने वाला पैदल सैनिक; पासाणो २-१३८ पासाया पाउओ वि (प्रावृतः) आच्छादित, ढंका हुआ; १-१३१। पासिद्धि पाउरणं न (प्रावरणम्) वस्त्र, कपड़ा, १-१७५/ पासुत्तो पाउसो पु (प्रावृट) वर्षा-ऋतु; १-१९, ३१, १३१ । पासू पाओ पु (पादः) पॉव; १-५।। पाहाणो पाडलिउत्ते न (पाटलिपुत्रे) पाटलि-पुत्र नगर में; २-१५० पाहुडं पाडिएक्कं पाडिक्कं न (प्रत्येकम्) हर एक; २-२१०। पिअ पाडिप्फद्धी पुवि (प्रतिस्पर्धी) प्रतिस्पर्धा करने वाला; १-४४, २०६; २-५३। पिओ पाडिवआ पाडिवया स्त्री (प्रतिपद्) प्रतिपदा, एकम् तिथि; पिआई १-१५, ४४। पिअ पाडिसिद्धी स्त्री (प्रतिसिद्धिः) अनुरूप सिद्धि, प्रतिकूल सिद्धि १-४४; २-१७४। पिउओ पाणि न (पानीयम्) पानी, जल; १-१०१,२-१९४ पिउच्छा पावं २३१॥ पहुडि पा न (प्रवचनम्) प्रवचन; १-४४। न (प्रावरणम्) वस्त्र, कपड़ा; १-२७५ । वि (प्रावरकः) आच्छादक; ढाँकने वाला; १-२७१। वि पु (प्रवासिन्) प्रवास करने वाला; १-९५। वि पु (प्रवासिन्) प्रवास करने वाला; १-४४ | नं (पाद-पीठम्) पैर रखने का आसन; १-२७०। सक (पश्यति) वह देखता है; १-४३। नं (पार्वम्) कन्धे के नीचे का भाग; पांजर २-९२। पु (पाषाणः) पत्थर; १-२६२। पु (प्रासादाः) महल; २-१५०। स्त्री (प्रसिद्धि;) प्रसिद्धि; १-४४। वि (प्रसुप्त) सोया हुआ; १-४४। पु (पांसुः) धूलि, रज, रेणु; १-२९, ७०। पु (पाषाण:) पत्थर १-२६२। नं (प्राभृतम्) उपहार, भेंट; १-१३१, २०६। अ (अपि) भी; १-४१; २-१९८, २०४, २१८। वि (प्रिय) प्यारा; २-१५८ वि (प्रियः) प्यारा; १-४२; ९१। वि (प्रियाणि) प्रिय; २-१८७। वयंसा पु (प्रिय वयस्यः) प्यारा मित्र, प्रिय सखा; २-१८६। पु (पितृक:) पिता से सम्बन्धित; १-१३१। स्त्री (पितृष्वसा) पिता की बहन; २-१४२। पिअ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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