Book Title: Paumchariu Part 3
Author(s): Swayambhudev, H C Bhayani
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 220
________________ २१२ पउमचरित प्रश्केण भवेन्चउ भव- समुह 1 कम्मोह- मोह - जलयर - रउ ॥७॥ एकहीं ज दुवाखु एकहीं ज सुक्खु । एकही ज वन्धु एकहो ज मोक्नु मा! एकहो जै पाउ एकही ज धम्मु । एक्कहाँ जें मरणु एकहों में जम्मु ।।६।। घत्ता तहि नेहा विहुरे सयण-सया ॥ दुक्कियई । पर वेपिण सया इ जीवहाँ दुलिय-सुक्कियई ॥१०॥ 'रावण जुलाजुत्त तुहँ चिन्तें त्रि णियय - मणेण । अण्णु सरीरु वि अण्णु जिउ बिहड एड खणेण' ।।१।। पुणु वि पड़ीबड उबवण महणु । कहा हियत्तगण मरु - गन्दणुः ।।२।। अण्णसाणुवैक्स दहगीवहाँ । अण्णु सरीरु 'अण्णु गुणु जीवहाँ ।।३।। अण्णहि तणउ धष्णु धणु जोन्वगु । अण्णहि तणउ सयणु घरु परियण ।।४।। अध्यहिं तगड ऋलस लइज्जइ । अण्णहि तणउ तण उप्पज्जड़ ॥५ का वि दिवस गय मेलाव । पुणु विहन्ति मरन्ते एक्के ॥६॥ अगणहि जीउ सरीरु वि अयणहि । अहिंघरु धरिणि वि अण्णण्णहिं ।।७।। अण्णहि नुस्य महग्गय रहवर । अण्णहि आण - पहिच्छा गरवर ।।८11 पहए अग्ण - भवन्तर - बन्तर। अत्थ - विडावि होइ स्वणन्तर 11611 घत्ता जणु काजवसेण मुह - रसियउ पिय - जम्पणउ । जिण धम्मु मुपति जीवहीं को वि ण अप्पणः ।।१०।। [३] साउ-गइ-सायर दुह-पउर जम्मण- मरण- रउ । अप्पहि सिय म गाउँ करि म पनि णरय-समुन्द ।।१।। भो भुवण - भयङ्कर दुण्णिरिक्स । सुशु चउगइ संसाराणुवेक्ख ॥२॥

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