Book Title: Paumchariu Part 3
Author(s): Swayambhudev, H C Bhayani
Publisher: Bharatiya Gyanpith

View full book text
Previous | Next

Page 226
________________ २१८ पउमचरिड चउ-विहि आउ-परिमाणएँ हि । ते गडइ-पयार हिं गामहि ॥६॥ विहिं गात्ती महल-समुझलहिं । पञ्चहि मि अन्सराइय-खले हि ॥७॥ छाइजइ हिजइ भिउजइ वि ! मारिजइ वजह पिज्जइ बि ॥८॥ पिष्टिज्जा वामद मुबह वि । जन्तेहि दलिसह मनइ वि ।।१।। पत्ता प्रिय कम्म-बसेण . जम्मण-मरणोद्वद्धएं ग । विसहेवउ दुक्खं जेम गइवें वडाण ||१०|| [१३ भणमि सहें दहशयण जाणेवि एउ असार । संवरु मा वि णियय-मजिजउ परयार ॥१॥ भो सयल-भुअण-लघमी-णिवास 1 संवर-अणुवेक्षा सुणि दसास ॥२॥ रविवजाइ जीड सरागु केम । इ हुकर अयस-काला जेम ||३।। दिनई रक्खणु जो जासु मल्ल । कामहाँ अ-कामु सल्लहाँ अ-सालु ॥३॥ दम्भहो अ-दम्भु दोसह) अ-दोसु ! पावहाँ अ-पाव रोखही अ-रोसु ॥५॥ हिंसहो अहिंस मोहहाँ भ-मोहु । माणहाँ अ-माणु लोहहाँ अ-लोड ॥६॥ णाणु त्रि अण्णाणही विठ-कशाहु । मच्छरहों अ-मच्छरु दप्प साहु ॥७॥ अ-विओउ वियह दुणिवार । जमु अय सहाँ दुप्पइसारु वारु III मिच्छ्त्तहों दिढ-सम्मत्त-पयरु । भेस्लिाइ जेम प - दह-अरु ।।। पत्ता परियाणवि एड णव-लुप्पल- जयण-जुय । परि रामही गम्पि कर लाइजड़ जणय-सुय ॥१०॥ रावण पिजर भावि नहुँ ना दय-धम्म मूलु। तो परि जाणवि परिहरहि किजा तहाँ भणुकूलु ॥१॥ लाहिव दणु - दुग्गाह · गाह 1 हिजर - अणुचेक्खा णिसुणि माह ॥२॥

Loading...

Page Navigation
1 ... 224 225 226 227 228 229 230 231 232 233 234 235 236 237 238 239 240 241 242 243 244 245 246 247 248 249 250 251 252 253 254 255 256 257 258 259 260 261