Book Title: Paumchariu Part 3
Author(s): Swayambhudev, H C Bhayani
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 240
________________ २१२ पठमचरिउ तेहिं मिलें घि पइसारिजातः । लक्खिड़ लावण-समें हिं एन्तः ||६| पत्ता हिपरन्त हि वण-बाल ओ विहि-परिणामें पदउ । • सो पुण्णोदय-काल जसु णाई पट्टीबड़ विवउ ॥१०॥ तहाँ तइलोक - चक - मम्भीसहों। मारुङ चलहि पडिउ हलीसही ॥ १॥ सिरु कम-कमल-णिसण्णु पदासिङ | णं णीलुप्पल परय - मीसिउ ॥२॥ चलेग समुहाविड सह हाथें । कुसलासीस दिण्ण परमार्थे ॥३॥ कपठउ कडद मउड्डु कडिसुखड़ । सयप्लु समप्पवि मण पजलन्सउ ॥४॥ सासम वसा नाय । जो पंसिड साबर्ष सूडामणि ॥५| ने अहिणाणु समुज्जल - गामहों । वाहिण - करअल असिड रामहाँ ॥६॥ मणि पेक्खवि सम्बर गु पहरिसिउ । उरण मन्तु रोमन्यु परिसिउ ॥७॥ जो परिमोसु तेश्रु संभूभस । दुक्कर सीय - विषाहँ वि हूयउ HII छत्ता पभणइ राहश्चन्दु 'महु अज वि हियउ ग गीवइ । मारुइ अक्खि इति किं मुइन कन्स किं जीवई ॥६॥ [ ] जिण-चलणारविन्द - बल-सेवहाँ । मारुड् कहर बत बलवहाँ ।। 'जाणइ दिदु देव जीवन्सी । अणुदिषु नुम्हर णामु लयन्ती ॥२॥ जहि अवसरै णिसियर हि गिलिज्जइ। तहि तेहएँ वि का परित्रच ॥३॥ इह-लोयहाँ तुहुँ सामि पियारउ । पर-लोयहाँ अरहन्तु महारउ ।।४।। मायइ साहु जेम परमप्पड । उववासेहि सहसापड अप्पड ॥५॥ मई पुणु गम्पि गिपन्तहुँ तियसहुँ । पाराविय वावसई दिवस? ॥६॥ अरियलउ णवेवि समप्पिर । ताहि महु चूडामणि अप्पिउ ॥७॥ अणु वि व एर अहिणाणु । जं लिउ गुस-सुगुरुहँ दाणु ॥६॥

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