Book Title: Kalpa Sutra
Author(s): Bhadrabahuswami, 
Publisher: Nagor

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Page 209
________________ पाणानकातिवाचवा नाकलिवो पासिंवा श्राय सा० वर्धाकालिरह्यासाधुन पात्रानाधरणहा Sas यावाभिकभितएवा पतिसितaawaraायामपस्यासविथ पडि रखविरकल्पासाधन नाकल्प अविनिमनिरतरमिघवधि रहस्बनधरि सातन PLAYधातभनक SNSENSNA गारारिमलिलवानालाम्पा वग्धारिश्रहिवायसिगादाबाद कानि “पाणान ईकानिअमवानाकनियो यसो अधवाकल्पश्तेह घोडीमेप्रधिधात अति कल्यप्रसाधुनाए निरालाबडाकरामद ताएवा पाणाएवानिरकमित्रएता पविसिन्नएचा कप्पासऋणानुहिका लिस माधाडकावणासासरदरतापवरसा रस्त्रनावत रदस्तनधरि सातकानि पाणीकानि नाकलवो पइसारााणा तिर विष-गोचरीत्र तरमननीवस्त्र मुषस्ताव तरुन्नरसगाहावनाएवापाणाएवा निस्कमितएवायविसितएवाश्यं गंधाय३३० वीकालिरह्यासाधुन साधुन सासनई अधवा सदस्नग्धरि आहार वितरिवार 020 वासावासंपाद्यासवियस्मनिग्गंधस्स नियांधावा गाहाले पिंडवायय सण पश्चांधकाम रहारबरसतह पता कल्पादनः वनमादेला यह डिछाए अनिकमा निअिधिकार निवाश्यक्ताशम अहेमाराम

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