Book Title: Kalpa Sutra
Author(s): Bhadrabahuswami, 
Publisher: Nagor

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Page 228
________________ आर्यभूवुराकर सातपुतेक तिकोनियनिग्रेवाधवा पर्युषणारिनपखा अधिकरणकया इ गुर्वदिक द्याव्यसीतिश्तसिजानिगाणवारपरंपाद्यासवणा अदिगर यराघश तसाभुगप्रदिधाकाढिाण्या वर्षीकालिरह्मासाधुन एनवन श्रावक संघको काढिव साप asविष गोधयशसनिहियावासिया पावासावासंघाद्यासवियादव निश्वर नियंनियं आतिपर्युषणावर कटकमकारचका अपनऊव शिध्यरत्नाधिक धानअधबा दिमाकरी रादिकलह बनिम्गधागवारवाचककाडकाविग्गाहसमुष्पनिका साहराय गुरुतिणिनई रनौधिकरणशिष्यपतकामावर अपक्षमिव पुरनयमावि |णियखामिद्यारायणिपवित्सखामिद्या गं०१२०० खरिखमाविय आपउपसमिवर्ड परनकषायधकारागदपधारहितबाफल्ययाइवर कोधमकी। उपसमा विव मसमियशवममाजिरावे समुचणाबजालगनायजामा उपसमा तेस्नई आरामनाकानादिक लेनउपसमासाथ तिहन नही जानादिकनी निश्चित आराधनाप... समस्तकाविआराउसमानाविश्रारात्यासिता 303 GANEdiyan म

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