Book Title: Jinprabhsuri ane Sultan Mahommad
Author(s): Lalchandra Bhagwan Gandhi
Publisher: Jinharisagarsuri Gyanbhandar
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विषय
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विषय पर्युषणामा प्रभावना
विजययंत्र-महिमा सत्कर्तव्यो ४९ वडनुं चालवू विगेरे ६१ सुलताननी माताना
शत्रुजयमां रायणथी दूध सन्मानमा
वरसावq ६७ दीक्षा विगेरे कर्तव्यो ५० गिरनारमा जैनबिंब–प्रतिष्ठा ५० अन्य प्रसंगो गोष्ठी-विनोद ७० सुलताने समर्पल भट्टारक- समकालीन इतिहास ७६
सराईमा प्रवेशोत्सव ५१ पेथडशाहे देवगिरि( दोलमथुरा तीर्थनो उद्धार विगेरे ५२ ।। तावाद)मां राजा रामदेव हस्तिनापुर-यात्रा-फरमान ५२ अने मंत्री हेमादिना सम. संघ साथे हस्तिनापुरमां यमां जिनदेव-मंदिर केवी
प्रतिष्ठा-महोत्सव ५३ रीते कराव्यु ? जेनी रक्षा महावीरना बिंबनी पुनः जिनप्रभसूरिए करी हती. ७८
स्थापना ५५ पेथडशाह पातशाही फरमानथी जैन
पेथडशाहे करावेला समाज अने जैन तीर्थोमां
८४ जिन-प्रासादो ८२
८६ निर्भयता ५५ पथडशाहनों सुकृतो
देवगिरिमां जिन-प्रासाद प्रभावक जिनप्रभसूरिना
केवी रीते कराव्यो? ८९ प्रभावथी प्रवर्तेला धामिक देवगिरिमा रामदेव राजाना
महोत्सवो ५६ राज्यमां शाह देसल अने सुलताननी सभामा सूरिजीनो सहजाशाहे करावेल जिन
बचन-प्रभाव ५७ मंदिर, जेनी रक्षा जिनप्रभकल्प-परिशेषनो उपसंहार ५७ सूरिए करी हती १०१ जिनप्रभसूरिनां चमत्कारी भयानक अल्लाउद्दीन-युग १०३ वृत्तान्तो, पीरोज सुलतान- कन्नाणपुरना जैन शिल्प
पर प्रभाव ५९ शास्त्री ठक्कुर फेरु १०७ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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