Book Title: Jain Shwetambar Conference Herald 1906 Book 02
Author(s): Gulabchand Dhadda
Publisher: Jain Shwetambar Conference

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Page 464
________________ - (३४) शाळानी परीक्षा में बे वखत लीबी हती, अने हाजर रहेली बाईओने वाचवा लायक पुस्तको भेट आपवामां आव्यां हता. ___ उपला ट्रॅक रीपोर्टपरथी स्पष्ट समजाशे के मुंबई जे शेहेर के ज्यां आशरे ८००० जैन स्त्रीओनो मोटो समूह छे, त्या सरासरी संख्या मात्र ८८ छे, अने हाजरी तो मात्रा ४० एटले के सरासरी संख्याना ४५ टकाज छे. आपणे एटलुं कबुल करीशु के घणी स्त्रीओ पर काम काजमा सवारना ११॥ अथवा १२ सुधी रोकाय. ते पछी ओछामा ओछा २-३ कलाक सामान्य रीते हिंदु संसारमा मळी शके. एकली वडिलो विना-रहेती स्त्रीओने, जो परज्द होय तो फरजंदने साचवामां वखत जोईए, ते सिवाय अन्य सर्व स्त्रीओ जेमने बीजी उपाधि न होय पण मात्र वखत केम पसार करवो तेज चिंता होय तेवी बेहेनौए अव्यय का शाळानो लाभ लेवो जोईए छे. जे बीजाने समजाववामां बहु काबेल होय ते बहनोए पोतानी बीजी बहेनोने शाळामां जवा समजावq ए अवश्य कर्तव्य छे. हमणां थोडा वस्तपर बोदराना अ. सौ. बहेन शारदा गौरी बी. ए. ए “ सुशिक्षित हिंदु स्त्री" नामे जे व्याख्यान आप्यु हतुं, तेनु रहरय एज छे के पत्नी पतिने केवी रीते सहायभूत थई पडे. भणेली स्त्री, जो खरुं पत्नीनुं लक्षण समजी शकती होय तो, हजार रीते पतिने मदद करी शके छे. तेना कामना मोटा बोजामांथी तेने मुक्त राखी शके छे. केळवणी-वांचतां, लखतां अने सामान्य हिसाबो गणतां-लेवामां आवे तो पण अतिशय उपयोगी छे, एतो निःसंशय खरुज छे. माटे बनी शके तेमणे आ शाळानो लाभ .. ठेवा चूक, जोईतुं नथी. शिक्षको त्रणे स्त्री छे, ए ‘पण अति आनंदनी यात छे. ही शिक्षको मेळवया . केवा मुश्केल छे, ते तो अनुभव करनारनेज खबर पडे. परंतु सारा नसीबे स्त्री शिक्षको मळी छे; तेथी आ शाळानो लाभ लेवामां कोई रीते मन संकोचा, जोइए नहि. लाभ नहि लेनार भूलशे अने पाछळथी परतावो नकामो थइ पडशे. वखत गयो ते पाछो आवी शकतो नथी. माटे अवश्य लाभ लेवा बहनोने विनंति छे. ___ छापेटु भरावनुं काम, जरी भरयानुं काम विगेरे कळा शिक्षण आपवामां आयेछे, तेनो लाभ पण अवश्य लेवावो जोइए. सामान्य स्थितिनी स्त्रीओए तो खास करीने आवा हुन्नरो शीखवापर ध्यान राखवू जोइए. माटे दरेक सुज्ञ बहेनोने अवश्य आ संस्थानो लाभ लेवा विनंती छे. . फतेहचंद कपूरचंद लाल... ओनररी सुपरवाइमर. -

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