Book Title: Atmanand Prakash Pustak 012 Ank 08
Author(s): Jain Atmanand Sabha Bhavnagar
Publisher: Jain Atmanand Sabha Bhavnagar

View full book text
Previous | Next

Page 27
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir mara..२२५ મુનિવિહારસે હોતે હવે લાલે ढाइ गइ और मुनिश्री लब्धिविजयजीके नाषण होनेसे सरकारी पुरुषोंने नी लाज लियाथा और रतलाम निवासी शेठ जोरावरमलजीकी तरफसे स्वामी वच्छल करनेमें आयाथा बाद आपका पधारना शैलाना राजधानी में हुआ यहां पर जी प्रसिफ व्याख्यानधारा धर्मका गठ अच्छा रहा, व्याख्यानमें राजकीय पुरुषोंने भी अच्छा लाज उगयाथा जिससे शैलाना दरबार राजा साहिबने श्रीमान् शान्तमूर्ति मुनिश्री हंसविजयजी महाराज आदि मुनिरा. जकी मुलाकात सेनेके लिये राजा साहिबने राजकीय पुरुषों द्वारा जतलानेसे महाराजश्री हंसविजयजीने अपनी तरफसे जैनाचार्य श्रीमधिजय कमलसरीश्वरजी महाराजके शिष्य मुनिश्री लब्धिविजयजी महाराजको राजकीय माननीय श्रीयुत बक्षीजीके साथ राजा साहिबके पास जेजदिये. मुनि महाराज श्री लब्धिविजयजोसे राजा साहिबने अन्यान्य कई विषयोंपर प्रश्न किये जी अच्छा है, इसलिये उत्तरसेसे क्योंकि आप संस्कृतसे अच्छे वाकीफ है, और दर्शनादिकका झान सन्तुष्ट होकर राजासाहिबने यह फरमायाकी यदि आप के साथ एक चौमासे तक सहवास रहे तो विशेषलान हानेकीसंनावना है, इसलिये नचित यही है कि आप चातुर्मास तक यहांपर ही विराजमानही रहैं क्यों किश्-३ दफा जैन साधुओंसे समागम हुआ लेकिन आप जैसे विधान् जैन साधुका समागम आज ही प्राप्त हुआ है. वगेरा बातें प्रश्नोत्तर समाप्त होनेपर मुनिमहाराजजोसे-राजा साहिबने जनते समय यह फरमाया दरवाजेमें आकर कि जहांतक हो सके वापीस इधरकी और ही बोटे मुनिमहाराजके जानेसे राजा साहिबका अनुराग जैनदर्शनपर बहूत ही अच्छाहू क्यों कि राजा साहिबस्वयं संस्कृतका झान अच्छग धराते हैं. बाद यहांसे बोटे मोटे ग्रामोंमें विचरते हुए प्रतापगढ पहुंचनेका विचार था, परन्तु रास्तेमें अरणोद श्री संघको अत्यन्त प्रार्थना होनेसे बड़ी दिदाका कार्य यहांपरही निश्चित रखा. आपका यहापर नगरमें प्रवेशके समय अंग्रेजी बाजे निशान तथा सजे सजाये तुरंगादि अत्यन्त गठ रहाथा और बाजारको धजायेधारा बमा ही सुशोभीत कर दियाथा इसतर बझे समारोहके साथ प्रवेश हुआ और उपाश्रयमें पधारकर सर्वको धर्मापदेश सुनाथा और इसीतर गुणोत्कीर्तन श्रवण करनेसे प्रतापगढके नरेश महाराजा के कारनारी सादिव आदि राजकीय पुरुष आपके दर्शनार्थ श्राएथे, ओर साथमें प्रतापगढके निवासी जैन जातीके हितेनु श्रीयुत शेठ लक्ष्मीचंदजी घीया अपने विशाल मित्रमंगलके साथ तशरीफ लाएथे आपके यहांपर विराजनेसे For Private And Personal Use Only

Loading...

Page Navigation
1 ... 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37