Book Title: Anusandhan 2011 09 SrNo 56
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 127
________________ ऑगस्ट २०११ संथारो हवे निश्चित हशे ओम जणावी कवि हवे बारमा मास ( अषाढ) ने वर्णवे छे. १२१ अषाढ मासे अनशन लई, खमतखामणां करी, देह वोसराववानुं मुरीबाईओ पगलुं भर्यु. रघुभाई तथा मेघबाई शेठाणी सती - साध्वीओने ऊलटभेर दान आप्यां. खेतशीभाईनी पुत्री झमकुबाई तेमनी सेवामां रही. १३ दिवसनो संथारो करी सं. १८९०ना अषाढ सुद १४ना शुक्रवारना रोज स्वर्गवास-काळधर्म पाम्या. मुरीबाईनी जीवनकथा अहीं पूरी थाय छे. तेरमा अधिक मासमां कवि पोतानी अने पोताना समयनी विगतो आपे छे. कविना घरनी पासे स्थानक ( उपाश्रय) छे. जीवणभाई शेठ अने झमकुबाई शेठाणीओ करावेल छे. आ स्थानक जोईने कविनुं दिल ठरे छे. साधुजननी सेवा, हृदयमां भक्ति लावीने करवानी ते प्रेरणा आपे छे. मानवनो भाव दुष्कर छे. पुण्यकर्मने कारणे उत्तम अवो जिनधर्म प्राप्त थयो छे तेनी कवि सराहना करने छे. आ रचनासमये न्यायप्रिय राजा वखतसिंह राणा राज्य करता हता. अंते तेओ प्रस्तुत रचनानी साल अने कविनाम आपे छे ते मुजब आ रचना सं. १८९२ना मागशर सुद १३ने गुरुवारना रोज करवामां आवी छे. अर्थात् मुरीबाई महासतीना काळधर्म पाम्या बाद बे वर्षमां ज आ रचना थई छे. कविओ पोताने हरखाना दीकरा शिवराज (जे सायलामां रहे छे) तरीके ओळखाव्यो छे. आम, आ तेरमासा अ परम्परित बारमासी प्रकार करतां थोडुं अलग प्रकारनुं होवाथी, तेमां तत्कालीन समयना राजानी, कविनी माहिती होवाथी, औतिहासिक मूल्यवत्ता धरावे छे. अहीं परम्परित प्रकृतिवर्णननी ओथ लेवाई नथी, के विरहनो ऊंडो, उत्कृष्ट सूर नथी, छतां श्रीमूरीबाई महासतीना तपोमय जीवननी झरमर कशाय ओप विना ओवी सुन्दर रीते आलेखी छे के श्रीमुरीबाईनी मोक्ष मार्गनी लेह उत्कृष्टपणे दर्शावी शक्या छे. ओ रीते आ कृति अनोखी छे.

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