Book Title: Adhik Mas Darpan
Author(s): Shantivijay
Publisher: Sarupchand Punamchand Nanavati

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Page 32
________________ अधिक-मास-दर्पण. २९ -rrrrrrrrr ~~ अकेले बेठकर शास्त्रार्थ किया तो संघको क्या फायदा हुवा, अगर संघकी जरुरत नहीं तो फिर विज्ञापन वगेरा लेख किनको दिखलानेके लिये छपवाये जाते है इस लिये वादी प्रतिवादी सभादक्ष दंडनायक और साक्षीके जरीये सभा किइजाय और संघका मेरेपर आमंत्रण आवे तो में सभामें शास्त्रार्थके लिये आनेको तयार हूं, चौमासेके लिये दुसरे शहरकी विनति है. हिंदी आषाढवदी गुजराती जेठवदी त्रयोदसीके रौज दुसरी जगह जाना होगा. ३ सभा होनेपर हारजीत किसकी होती हैं और मरीचि तथा जमालिकी तरह उत्सूत्र प्ररुपणा किसकी है मालुम हो जायगा. जाहिर चर्चाके विषयकी हस्ताक्षरसे लिखी हुइ खासगी चिठीयोंके जवाब देना में गेर इन्साफ समजता हूं, • इसीलिये आपकी रजिष्टरी किइ हुइ चिठीकाभी जवाब मेंने नहीं दिया था ब-जरीये छापेके जो कुछ पुछा होता तो जवाब देता आगे आपने अपने विज्ञापन नंबर नवमें लिखा है ताकात हो तो बंबइकी पुलिसचोकी कोतवालीमें शास्त्रार्थ करनेको आवो. जवाब-कोतवालीमें और पुलिसचोकीमें शास्त्रार्थ करना आप मुनासिब समजते होगे मुजे तो बंबइके जैनसंघकी सलाहसे धर्मस्थानमें पंडितोंकी सभामें शास्त्रार्थ करना मुनासिब दिखाई देता है. ४ मेरी बनाइ हुइ किताब पर्युषण पर्वनिर्णय छपेको आज करीब नव महिने हो गये और दुसरी किताब अधिक___Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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