Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01 Author(s): Siddharshi Gani Publisher: Vishva Shanti Prakashan View full book textPage 7
________________ देशान्तर घूमते हुए क्या आपने कुशस्थल से अधिक सुन्दर कोई नगर देखा है ?" वरदत्त सेठ प्रणाम पूर्वक बोला कि, "महाराज ! आप श्री के अधिकार में अनेक नगर हैं परन्तु दीपशिखा नगरी इन्द्रपुरी जैसी सुन्दर है / वहां सर्व प्रथम राजा का भव्य प्रासाद है / नगर के मध्य भाग में प्रथम भगवान् का चार मुख्य द्वारों वाला एक अति रमणीय मन्दिर है / उसकी चारों दिशाओं में बाजार, गृह, प्रासाद, किल्ले हैं। ईशान कोण में राज कुटुम्ब रहता है, अग्नि कोण में व्यापारी वर्ग और नैऋत्य कोण में अन्य जाति के लोग निवास करते हैं। नगर के बाहिर सुन्दर कमलों की श्रेणी से सुशोभित पद्म सरोवर हैं / समीपवर्ती अनेक वाटिकाएं, उद्यान / प्रादि मनोहर स्थल हैं। मैं उसी दीपशिखा नगरी का निवासी हूँ, हे महाराज ! वह | सुन्दर नगरी वास्तव में आप श्री के देखने योग्य है।" यह सुन कर राजा प्रतापसिंह को उस नगरी को देखने की प्रबल इच्छा उत्पन्न हुई / मुख्य मन्त्री के प्रोत्साहन से उन्होंने सैन्य सहित / दीपशिखा की ओर प्रयाण किया उस समय सारी प्रकृति रमणीय थी / मन्द 2 समीर चल रही थी / शुभ पक्षी मधुर पालाप कर रहे थे। एक दिन प्रतिहारी ने राजा के पास आकर विनंति की कि "महाराज ! चार कलाकार आप श्री की सेवा में उपस्थित होना चाहते।। हैं / '' राजा की आज्ञा होने पर उन चारों को हाजिर किया गया / राजा ने उन से पूछा कि "आप किस 2 कला में प्रवीण हैं ?" पहला P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak TrustPage Navigation
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