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श्रुतसागर
फरवरी-२०२० औद्योगिक इकाईयों से उत्पन्न सल्फर डाइऑक्साइड व मोटरगाडियों के द्वारा निकला नाइट्रोजन ऑक्साइड कागज के रासायनिक अपघटन का मुख्य कारण है । सल्फर डाइऑक्साइड ऐसे कागज को भी अपघटित कर देता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में सेल्यूलोज उपस्थित होता है। पाण्डुलिपियों को अच्छी तरह से बंद कबाटों में रखने से वातावरण में उपस्थित गैसों से इनका अच्छी तरह से बचाव होता है। ___धूल के कण भी कागज को हानि पहुँचाते हैं। उसके तीक्ष्ण कण न केवल भौतिक हानि पहुँचाते हैं, बल्कि रासायनिक अभिक्रिया भी उत्पन्न करते हैं। वास्तव में धूल एक निष्क्रिय पदार्थ नहीं है, इसमें अम्लीय व धात्वीय आयन उपस्थित होते हैं, जो कभी-कभी क्षयकारी साबित होते हैं। धूल के कण नमी को भी आकर्षित करते हैं, जो रासायनिक व जैविक अभिक्रियाओं को बढ़ावा देती है। (ख) स्याही का प्रभाव ____ पाण्डुलिपियों में दो प्रकार की स्याही का उपयोग पाया गया है, आइरन गॉल इन्क व कार्बन इन्क । अधिकांशतः यह पाया गया है कि कागजी दस्तावेज, पाण्डुलिपियाँ व चित्र जिन्हें आइरन गॉल स्याही से लिखा गया हो, वे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। परिणाम स्वरूप कागज का भौतिक अपघटन होता है। कागज पाण्डुलिपियों का वास्तविक अपघटन होने के उपरान्त, लेखन फफूंदग्रस्त हो जाता है व शब्दों के कोने भूरे पड जाते हैं। कई बार स्याही के कारण सटे हुए अन्य कागज भी प्रभावित हो जाते है। यह सिद्ध हो चुका है कि आइरन गॉल स्याही प्रबल अम्लीय होती है, इसका pH मान 2 से 3.7 के बीच होता है।
आइरन गॉल स्याही के निर्माण में प्रयुक्त होने वाला सबसे लोकप्रिय धात्वीय लवण फेररस सल्फेट था, इसका प्रयोग कार्बन स्याही में मिलाने के लिए भी किया जाता था। फेररस सल्फेट, गेलोटिनिक अम्ल से अभिक्रिया करके आइरन-गैलोटेनेट्स व सल्फ्यूरिक अम्ल बनाता है। बचा हुआ फेरस सल्फेट फेरिक ऑक्साइड व सल्फ्यूरिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है तथा सामान्यतः नहीं बिगडने वाले अधिक सेल्यूलोज वाले कागज को भी क्षतिग्रस्त कर देता है।
(क्रमशः)
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