Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 20
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala
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________________ // 4 // // वैराग्यकल्पलताः - 2 // - // षष्ठः स्तबकः // अथास्ति स्वस्तिककलितं, बहिरङ्गमनोहरम् / वर्धमानपुरं प्रौढैर्वर्धमानं महोत्सवैः // 1 // चारुलीलागतिर्यत्र, सदानो विलसत्करः / जनवर्गो महाध्वानो, धत्ते स्तम्बेरमश्रियम् // 2 // तत्र प्रत्यर्थिकान्ताश्रुधारासिक्तयशोद्रुमः / भूपोऽभूद् धवलो नाम, भीमकान्तगुणाश्रयः // 3 // तस्यासीत्. कमलाजैत्री, देवी कमलसुन्दरी / तस्याः कुक्षिसमुद्भूतः, सुतोऽस्ति विमलाभिधः बालकालेऽपि यः स्पृष्टो, न धन्यो बालचेष्टितैः / महाहर्म्यस्थित इव, प्रावृट्कालेऽपि कर्दमैः तत्रैवाभूत् पुरे श्रेष्ठी, सोमदेवो महाधनः / . लावण्यनिलयस्तस्य, भार्या कनकसुन्दरी // 6 // कुक्षौ प्रवेशितस्तस्या, अहं पुण्योदयान्वितः / भवितव्यतया काले, सा मां प्रासूत हर्षिणी // 7 // जातः पुत्रो मयेत्येषांऽभिमानं हृदये दधौ / तदा दृष्टोऽन्तरङ्गत्वाज्जातः पुण्योदयस्तु नः विहितः सोमदेवेन, सुतजन्ममहोत्सवः / स वामदेव इत्याख्यां, द्वादशेऽह्नि चकार मे // 9 // * अद्राक्षं व्यक्तचैतन्यं, प्राप्तोऽहं मानुषत्रयम् / द्वौ नौ ललनां चैकां, वक्रां शक्रायुधाकृतिम् // 10 // तेष्वेको मां समालिङ्गय, स्नेहादित्थमभाषत / मित्र ! प्रत्यभिजानीथे, नवा नेति मयोदितम् // 11 // // 8 //

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