Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 05
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala

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Page 11
________________ // 12 // // 13 // // 14 // // 15 // . // 16 // // 17 // इण्डिं पुण वत्तव्वं, ण णाममित्तेण होइ गुरुभत्ती। चउसु वि णिक्खेवेसुं, जं गेज्झो भावणिक्खेवो तित्थयरसमा भावायरिया भणिया महाणिसीहम्मि। णामठवणाहिं दव्वायरिया अणिओइयव्वा उ तत्थ णिओगो एसो, जं दव्वं होइ शुद्धभावस्स। . तण्णामागिइतुल्लं, तं सुहमिअरं तु विवरीयं . जह गोअमाइआणं, णामाई तिन्नि हुंति पावहरा / अंगारमद्दगस्स य, णामाई तिण्णि पायरा . एयगओ अ विसेसो, भावं ववहारओ विसेसेइ। .. णेच्छइअणओ णेच्छइ, एयं णियमस्स भंगेणं / एवं बहुगुरुपूजा, ववहारा बहुगुणा य णिच्छयओ। एगम्मि पूइअम्मी, सव्वे ते पूइआ हुंति नणु आलंबणमित्तं, बझं ववहारसंमयं वत्थु / णिच्छयओ च्चिय सिद्धी, साहूण सुअम्मि जं भणियं परमरहस्समिसीणं, समत्तगणिपिड़गझरिअसारांणं / परिणामियं पमाणं, णिच्छयमवलंबमाणाणं सुद्धो अ णिच्छयणओ, सुद्धाएसा य परमभावगया / अपरमभावगयाणं, ववहारो नृणमुवयारो भरहो पसन्नचंदो, आहरणा णिप्फलम्मि ववहारे / इट्ठविसओवणीयं, झाणं चिय सव्वकज्जकरं णिच्छयलाभालाभे, ववहारारोवणं च भव्वाणं / तित्तजलपाणऊसरबीयारोवोवमं होइ वयभंगे गुरुदोसो, भणिओ दुव्वारओ अ सो इण्हि। तो चरणपक्खवाओ, जुत्तो ण उ हंदि तग्गहणं . // 18 // // 19 // // 20 // // 21 // // 22 // // 23 //

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