Book Title: Sambodhi 1977 Vol 06
Author(s): Dalsukh Malvania, H C Bhayani, Nagin J Shah
Publisher: L D Indology Ahmedabad

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Page 393
________________ तरंगलाला २४३ तत्तो कुगइ पइण्णं न मए अण्ण महिला मणेणं पि। । पत्थेयब्वाउ(व?)स्स जम्मम्मित्थ (?) तं मोतु ॥१८१ भणइ य पुच्छह गंतुं केण इमो चित्त पट्टओ लिहिओ। जं नेयरी समत्थो लिहिउ मह पिययमा रहओ ॥१८२ सोउं चेमं सामिगि कहियाममेसि पुच्छग-समए । हाहि त्ति चिंतिउ पुण पडतियं तुरियमाया[या] ।। १८३ तत्थ वि दीवुस्सिकण किरिया-वाजेण जाव चिट्ठामि । तावागओ वयसो तस्सेको तत्थ मं भणम् ।।१८४ केण कय चित्तमिणं भणिय च मए तरंगवइयाए । सेहि कण्णाए लिहिय समणुभूय ति सो गओ ।।१८५ अणुमग्गओ गया ह [च] तस्स तो तत्थ एक पासम्मि । अच्छामि जाव ता तेण साहिय स मित्तस्स ॥१८६ तो भणइ सोहणमिण होही जेणत्थ गविओ सेदी । सो पडिसेहइ बरए सम्बे एते कुमारीए ॥१८७ मित्तेहिं तओ भणिय जं ताइ मूलडिओ(?) सम्म । ता अच्छिउ दाओ(?) ता संपत्ती होहि कमेण ॥१८८ तो सो सगिह निज्जइ मित्तोहि अहं पिट्ठओ जामि । को त्ति सुद्धित्थमेसो स-वयं सो गिमईसीय ॥१८९ नाउ च तग्गिहमहं तप्पिउ नामं च पुच्छिउ सम्म । निप्पण्ण-पेसणा हं तत्तो तुरिय पडिनियत्ता ।।१९० सुह सुहयाणो (१) पहुत्ता इहं ति सोउं च तहं घरिणि । पिउ नाम-सहियं तन्नामं मे कहे... ... ...।।१९१ सारसियाए भणिय सोवणदेवस्स सिस्थवाहस्स । पुत्तो कला-गुण-निही नामेणं पउमदेवो त्ति ।।१९२ सोउं चेम तुट्ठा वि तो भावो मे एत्तिउ त्ति वोत्तुं च । उवगूढा सारसिया तीए मणिय किमत्थेणं ॥१९३ तत्तो हाया देवे वंदिउमुववास-पारणं कासी । ताओ य सहम्माए विहराविय साहवो विहिणा ।।१९४ ताहे य चेडिया मे पासाओ अवसरितु सारसिया । उण्हं विणिस्ससंती पुणो खणेणागया तत्थ ॥१९५ भणइ विसन्ना सामिणि सत्थाहो मित्त-बांधब-समग्गो । तुम्हें कए समुवगओ सेटिं अस्थाण-मज्झ-गय ॥१९६

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