Book Title: Pravachansaroddhar Part 2
Author(s): Nemichandrasuri
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 702
________________ [प्रवचन सारोद्वारे सटीके द्वितीय: खण्ड: ॥६७८ ॥ मंढा कालो तहस य पमरणमवृषं तु जं भवे तमिह । श्रद्धापच्चवस्वाणं दस मेयं पवपणे मरियं ॥ २३॥ महापच्चक्ाणे कालयमाणं न नियमत्रो भणियों I तहविहु जहनकालो मुहुत्तमित्तो मुणेयच्वो ॥२४॥ रमणीपञ्चवाणस्स तीरणरुवा सिहा समुट्ठिा | नवकारेण समेया नवकारसी पञ्चचूला वा ।। २५ ।। नवकार- पोरसीए पुरिम गाणेगठाणे य 1 प्रायंबिल मत चरिमे य प्रभिग्गहो बिगई ॥२६॥ दो चैव ममोक्कारे श्रागारा छच्च पोरसोए उ I सत्तेन य पुरिमड्ढे एगासनमम्मि प्रदेव ||२| सत्तेगडास य व य अंक्लिम्मि आगारा I पंचेव य प्रमत्तठ्ठे छप्पाणे चरिम चारि ||२८|| पण चरोऽभिहिए निब्बीए श्रट्ट नय य श्रागारा | अप्पावरणे पच य हवंति सेसेसु चत्तारि ॥२॥ नवगाहिम प्रवदहिपिसियघयगुडे चैव f नव आगारा एसि सेसदव्वाणमट्टे व १३०॥ निसिचराणं न चहार होइ मुरलीग नियमेणं । पोरसीयाद सव्वं तिविहं वा चउत्रिहं होइ ||३१|| नमु-पोरसी सड्डाणं चत्रहार होइ पुरिम तिविह वा | दु-ति-चउहाहारं पुण सड्डाणं हुति रयणीए । ३२ । नाणन पाणिज्जं सुणी सङ्काणं । तिविहाए हार ) पोरसोए पारिज्जा तत्थ दुगवेलं ॥ ३३॥ चितमोइयाणं सङ्काण मुषीण हुति गरा 1 पण निसि नो तिविहे सचित्ताणं ||३४|| नमु-पोरस सट-पुरीमढवटठ मतट्ट मिचिगइ विगई। एयाणि 'अपारियाणी हवंति श्रहियाणि श्रहियाणि ॥ ३५॥ प्रायाममभिरम हेगाणाणि पारिकण श्रहियाणि । खदुममाईणि नो पुठ संगयं कुज्जा ॥३६॥ १० भु. ॥ २रात्रिप्रत्याख्यानम् अन्यथाऽभिमप्रत्याख्यानम् च न पारणीयं जिसि एक बकवाद्यामपाः भिमाद संकिण पारिवा, इति वचनात् दिवसचरिमपच्चकखाइ इत्येवं पाठरूपं विनस्थ चरिको भागो रात्रिः यथा शेष दिवसप्रत्याख्यानं क्रियते तथा शेषरात्रिप्रत्याख्यान न भवति कियन्त्यामपि गतायां रात्री 'दिवसचरिमपचखाइ' इत्येव भवति, अन्यथा प्रतिक्षणं प्रत्याख्यानस्थ भिन्नत्वापत्ते, एवं सर्वत्र भाव्यम् ॥ ३०ई-मु. ॥ ४ पान आणी ॥ ५ हुज्जा DD पाष्टमादिप्रत्याख्यानं पूर्वसंगतं न मषति एतावता तस्मिन्नेव दिने पिण्डीकृत्य भवति पार्थक्येन न मति पूर्वमेकोपशसो विहितो द्वितीयदिने पद्यष्टस्तदा पष्ठं एवं प्रत्याख्यति न त्वष्टमादिः ॥ २ परिशिष्टे लघु प्रवचन सारोद्धारः गाथा २३.३६ ||६७८||

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