Book Title: Pravachansaroddhar Part 2
Author(s): Nemichandrasuri
Publisher: ZZZ Unknown
View full book text
________________
प्रवचन मागेद्रा मटीके
परिशिष्टे
द्वितीयः
प्रवचनसारोद्धारः गाथा ८३-१९
६८२॥
RANImmaNameemIMmmaNAIHARIRAMMANITARINAMEPREVI
वालिय-छड्डिय-तुसरहिय-सुबक जाताव मिस्सियं नेयं । लोणजय सागं मज्जिय तलिपण तं सुद्धा पन्ने मणति मजिजयधणाणं पक्षक--तलियमिव कालो । सग--पणदस-दसदिणं वासाइसु मिस्सलोणस्स ॥४॥ अंतमहुर्त 'मोयस्स चोवोसं जाम धाउपत्तगयं । गोमुत्तं जइ केवलमह साइमं रस विवज्जासे शा एखाइमि तले विच्चासे ति-चउ.-पण जाममुसिणनीरस्स । वासाइसु तम्मा फासुजलस्सादि एमेव Hasir
'उस्सेइम संसेइम तंदुलनीर तिलोदरी वादि । तुस जय प्रायाम वा सोबोरं सुद्धवियाडं च 191 अब कन्ट्रिाऽऽमलगं प्रयाग मालिंग खजूरं । दक्खा दाडिम कयरं चिचा नालियर कोलजलं ॥८॥ पुवतियं भत?, छ8 तिन-तुस- अबोदर्म मणिय । र सोमोर 'अट्ठमे उसिणनोरं च ।। अच्छमसिस्थं गलियं तियदडुक्क लिय--परिमियमलेवं । परकरजईण 'कप्पइ न कापण्णसुरुदोसा उस्से हम सेम तंदुल-तिल-तुस-जवाण नोरं च । प्रायामं सोवीर सुद्ध वियर्ड जलं नवहा ॥११॥ तिहला तमालपत्त मुस्थय-कुटु च स्वयरमाईहि । फासुकयं खजाइहि कारणो कपणिज तु ।। जितवेभत्तटूपडिमुवहाणेसु प्रमिगहा यामे । सट्टाणं चिय कापइ 'उण्ह जल प्रणसणे वि तहा 1||
चिचोदगमिगजाममायाम घण्णनीर मुहत्ततिगं । उच्छर से सोबोरे जामदुर्ग धोयणनमुह ॥६॥ वारस मंध पत्र मेयविमिस्सं खु हवाइ फासुजल । सकर गुड-खंडाइवत्युविमेएहि परिणमियं ॥१५॥ गो-एला महिसोग स्खोर पण-ड-दसदिणाणुवरि सुद्ध' । तिदिणाणुवरि बलद्धो नवप्पसूयाण एमेव It चउपहरोवरि जाय दहि सुद्ध हवइ कप्पणिज्ज च। तकरजुपखोरेयो बीयदिणे होइ सा कप्पा ६षा निष्णीरं तिलनिस्सं संवाणं तह वियारियफलार्ण । प्रचित्तमोइगो पुण कापड़ तक्करमणुगलियं ॥९॥ "निच्छल्लि-तिब्धीयं फलमाममम महत्तमुरिकय । प्रियलं तकरमिस्स न कप्पमुसणीकएण विणा HEEL प्रमवणस्य॥ २ तलशग्देन मध्यगतगर्भः।। ३तल-D॥ ४ उस्सेइम संसेम-D५ अडमे-D॥ DDL..-मु.॥- DL0. सहजले अण्पा मु.॥ ट्टी-DL ॥ निहल्लिननिकीय-भु ॥ १२ पइमु Dil
॥६८२॥
.
SonisterAF
HEAR
Milannilinominition
SRAELeoneindiahinilaondemnitiat
a dindabasinilons

Page Navigation
1 ... 704 705 706 707 708 709 710 711 712 713 714 715 716 717 718 719 720 721 722 723 724 725 726 727 728 729 730 731 732 733 734 735 736 737 738 739 740