Book Title: Pravachansaroddhar Part 2
Author(s): Nemichandrasuri
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 705
________________ प्रवचन सारोद्धारे सटीके निश्विगयं पक्कन्न असणजुयं तस्सिमेव परिमाणं । उन्द्रनिगापमा नलियरसे तं तहा जाण ॥६॥ घय-तिल्ल गुडाई वण्ण-रस-गंध-पमुहपज्जासे । कालपरिमाण मुत्तं जाणिज्जा नो तहा पायं ॥६॥ इत्थ य चलियरसम्मि जीवा बेइंदिया समुच्छन्ति। पुफिए एगिदिया 'बट्टति दुवेवि समगं वा । ७॥ अवित्तजले 'सचित्तीमवणे एगिदिया समुच्छति । अण्णरसुज्झियमिलिए पणिदी समुच्छिमा हुँति ।७१। तिल-मुग्ग मसूर चवलय-मास कुलत्थय-कलाय-तुवरीणं । वल्लाण वट-चणयाण पंग वरिसप्पमार्ण च जसा सालि-वीहि-जब-जुगंधरी-गोहम-तिण धन तिल-कपासा । वासतियं परिमाणं ततो विद्धसए जोणी ॥७३॥ लट्टा-कंगू-प्रयसी-सण- कोडूसग-वरट्ट-सिद्धत्था । रालय कुद्दब-मेही भूलग-बीया-च बड्डा य |७|| __ पिहियाणं लिताणं उक्कोसठिई उ सत्त वासाई। होइ जहणेण पुणो अंतमहत्तां च समग्गाणं [शा लिएपरि- 'खजूर-मिरी-मुद्दिय प्रभधा-बदाम खारिक्का एला-जाइफल' पुण कंकोल चारुकुलिया य ||७|| विसिज्जइ जोणी एसि जल थलोवभोगेहिं । संघाडय- जलफलाईयाण जोणी तहाचित्ता ॥७॥ 'जोयणसयं जलम्मि थलम्मि सट्ठी भंडसंकती । वायागणिधूमेहि पविद्धजोणी हाइ तेसि || हरियालं"लवण-मणसिल पूग-सेयाल-नालिकेरा य । एमेव प्रणाइन्ना विद्धत्ता अवि मुणेयवा ॥७९॥ सियसिंघव पासकरणी,''कहिगुलजा-१२-वडिंग-नागाइ।असित्तजोणिया फंदासाणाय-मिढल-मजिट्ठा। पिटू मिस्समसुद्धपण-चउ-१४तियदिणपमाणमापक्खं । सावणासोय पोसेसु जुअलम्मि य एस अणुप्रोगो || "पण-घउ-तिय जामाण माहदुगे वित्तजुयल-जिटदुगे। तह भज्जियधण्णाण वालीण विपज्जए पायं 1.HI परिशिष्टे लघुप्रवचनसारोद्धारः गाथा ६८.८२ १ मत-DL ||२वति-D L॥ ३ सचित्ती DL कोंडु. मु. ॥ फोडू. DL प्रवचनसारोद्धारे [गा, १९९] च ॥ ५ पहि. मु. ॥ ६ खजूर-DL॥ ७ ला DL८ जलफलयाईयाण- DL॥ प्रवचनमारोद्वारे १५५ तमं द्वारं द्रष्टव्यम् ॥१०.लं-मु.॥ ११ फटकही ।। १२ ई-मु. ।। १३० म. ॥ १४ पण मु.।। १५तियजामाणमापक्ख-D॥१६पण्ण मु.॥ | ॥६८१॥

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