Book Title: Pantrish Bolnno Thokdo
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 28
________________ (२६) धनुं जोजन करी, एटलां वानां करीश्रात्महितैषीए परदेश ज नहीं. ४ जे घरमां कोई माणस न होय ते घरमां न जq. न्य कारण विना पोताना व्यनी श्राशा न करवी. ६ परदेशमा थामंबर धारण करवो. ७ कोश्नी वात कोइने कदेवी नहीं. माता पितानी आज्ञा लोपवी नहीं. पए माता पितानी सेवा चाकरी मन राखी करवी. ए गुरु श्रने माता पिताना दररोज पग दाबवा. एर माता पिता श्रागल जूतुं बोल नहीं. एर माता पिताना धर्मादिना मनोरथ पूर्ण करवा. ए३ मोटा नाश्ने पिता सरखो जाणवो. एव जाश्नी उर्दशा पूर करवी, कुमार्गथी निवारवो. एए रोगमां, सुष्कालमां, शत्रुना नयमां अने राज छारमा, एटले स्थानके नाश्नी सहायता करवी. एद कोइ पण उत्तम कार्यमा जाश्ने नूलवो नहीं. ए नाटक, कौतुक, घणा जनोमांस्त्रीने जोवा जवा ... देवी नहीं. ए स्त्री पासे सारी रीते सेवा कराववी. एए स्त्रीने रात्रे बहार जवा देवी नहीं. Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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