Book Title: Pannavana Sutra
Author(s): Shyamacharya, 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 568
________________ कउदीरान करतेयी का उदेरी नई लेई ते नीतेशे तचरिं उक वेदना कहो न प्र सोनारकी नई प्रसव लगइ पत्र स्वत्तावर तायादिकनीपरपज एक इमजाव यवैतिर्यवत पस्पादिक परिश्नलाइ उ इत्यर्वतरा स्वनिदानवि तिर्यत्रनरअ कविकला तमा) पुरक पिवद वादतिखदपि किंडरकं शिवदरावाद त श्री सम्पग्रवि दावादतिरकमख दशिवद वादे ति गर्व आवारमा गियाना कति विदा होनाता त्रविकला गातमा विद्यावदापन्ना ऊदा) मानावा मियायं वक्कमिय्याय बानरइया) पोतात क्रियाशा कमियाददाशतनिवक्कमियोवदशावादति मन शोवगमियांदाद विद्यामि) यावदरावादति गरेकाववखरिदिया| बाचिदि यतिरिरका शिष्यामसाय विदणिविद इमनुष्यन जाइमियावमाणि गायaal/गारमा | डा हाविदरणामस्मत्रा तेज दाशवदावादतिय दायावदादेति॥गा |दाय शिवदगावादति च णिदायेशिवद तनावेदन विदेति सिकाइलातखवति परश्याणिदाएं शिवदादेतिणिदादिवादान गए राड विदामा ऊदासमयसम्म)तायातसम गिदायचरगवादतितासमानताएं) (गिदायोवदासदेति साता गायत चरयतास घ गादिति याऊदानरइया ||कतिविदाएं तावद नह हालिदा रमश्या चित्र देन निश्वितवास दुपसग्र दोन शोको गमिका ते स्वमेव दानर वेदनाले जर जाम साध इत्पार्धिकर वगमिया कही प्राफकिन उदेय उपे जरतायताव घटसामा गमिया वेदना नवजिती उदेशन रकमखदा ३३या ए 430 मात्र रजोब क नेदमणीया तवत्तेन लीबेॐ वेद तितिदाब लाधिकारा

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