Book Title: Pannavana Sutra
Author(s): Shyamacharya, 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 572
________________ करण जैस के के तुली वार के वलसमुदघातकी भी अतीत कालर मलि० एकरण्वारन की धापुरे० श्रागलिकर तोक, किड नऊन ही लस्स० |रकेश एक जे हन् ॐ इ ते हन इतो ए० एकवार क र परे केवल समदघात घणीवारन कर मनुष्य न कवलसमुद्यतकरा रह्या के लिय मादवसि सततोति कालइ पनि एकवार की धाक हार पर मनुष विना अनेरान अतीत काल इन ऊ ३३ए५० रमच्या गलिपणिएकवा स्पति का यमा हिग्राहाय श्री ग समघायाय ती केवला जिपी जरम हारकर ऊदाएकोबादादा को घन समतेनि विनिवश्यावाररकडा। कस्स किस्म श्नविभिदरस्मा गाकावादावातिनिवा) वाक्का। चत्राशियों तरंडावारमा गियान वरंमतीतादिवरे पारख कमाएगाम गस्त गोलोतान२५५स्म कि रतिया कर लिया या श्रतीता गाएका [धाररकमा गाकि स्इचिकस्मइन चिरस चियाका पा किस्म सविपाकावंडार गासाकरि गोदमाहि एग तालाच इ सिय समु हिमनविर हावसष्यता इंजन असं० कदाचित से व्याता तेव -ता इतेन व्यव रकमावि अदानरश् के वली समु घात कर स हवा जा नारकी माहि सदास व्या मनुष्यनश्क वली समुद घात ती अतीत काल इकोधात शरमाणियस्त्रवरंग रकडा al याधाररकम) प्रतीता कस्म सण विषम का सिविंद गये गय तिवचनी हवश्यावद (छादावमारिण) कोइ न इको. इन इ विघाना रकीनी प याब एवं जावा गोपवेया 기 मनः नारको एवं रायातीतागा प्रकाश्या शेव ०म० ते ० समुद्रघात तिविचचवीसादडगा नरश्याला शिवश्याश्राहारग सावधारक वश्याधार र कडा गया। एवं आवारमा मासा यश्मे गाए वाय्फइकाइया तोताकद तियाच्या दारगसम्रग ताश्रतीतागाचच पाच तामसांगतांनाकवतियाहार समायातीत/गा। सिय सोख्यासि साखद्याप सदर घान और किम शकल समुद्र घातक रानपानासराव तघाईते वेलाना पूजा श्री प्रातकालापवाकेय वचना समुदघात सात सय र तेली एग एककनार कनि २० नारकी वे वेदनासघात केतली बगौतमी • ती ते कार्ल श्री श्री अनिता काथा जेतेला पूर्व नेता लव का धा ते सो नेता वेदना समद्यात कथन परेक० ग्रा

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