Book Title: Padmcharita me Pratipadit Bharatiya Sanskriti
Author(s): Rameshchandra Jain
Publisher: Bharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
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३०२ : पद्मचरित और उसमें प्रतिपादित संस्कृति
धरती रूपी नवयुवती के सिर पर बंधे हुए मुकुट होता था
समान सुशोभित
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राजगृह नगर के वर्णन के बाद पदमचरित में राजा अंगिक का वर्णन किया गया है । परित में भी राजगृह वर्णन के बाद राजा श्रेणिक का वर्णन किया गया है | श्रेणिक वर्णन के बाद एक श्लोक में उसकी पत्नी खेलना का
वर्णन करने के पश्चात् विपुलाचल पर्वत पर उनकी महिमा का वर्णन किया गया है । याद भगवान् महावीर का इसी प्रकार वर्णन किया गया है।७
भगवान् महावीर के आने का तथा पउमचरिउ में श्रेणिक वर्णन के
पद्मचरित में समवसरण का विस्तार से पउमचरिउ में अपेक्षाकृत कम विभागका गर्णन किया गया है । ४
पद्मचरित में शंकायुक्त हो राजा श्रेणिक गौतम गणधर से रामकथा सुनने को प्रार्थना करता है । पउमचरिउ में भी ऐसा हो निरूपण है 14 श्रेणिक द्वारा प्रश्न किए जाने पर गौतम गणधर पहले क्षेत्र, काल के विषय में निरूपण कर बाद में कुलकरों का निरूपण करते हैं। पउमचरिउ में भी ऐसा ही किया गया है । ६
कुलकरों के वर्णन के बाद अन्तिम कुलकर नाभिराय की पत्नी मरुदेबी तया उनके सालह स्वप्नों व फलों का निरूपण है, पउमचरित में भी ऐसा ही विवेचन है । ८७
इस प्रकार पूरा पउमचरिउ पद्मचरित के प्रभाव से ओतप्रोत है । अन्तर यही है कि पद्मचरित में विस्तार और पउमचरिज में संक्षेप पाया जाता है। साथ ही स्वयम्भू ने निजी काव्यात्मक प्रतिभा का भो पउमचरिउ में उपयोग किया है ।
७९. हि तं पट्टणु रायगिहु धण-कणय समिद्धव । र्णे पिहिविए गय जोषणए सेहरू आइ ॥
८०. पद्म० २।३३-७० ।
उमचरिउ ४२४ । ९ ।
८१. पउमचरिउ १०४, ५, ६ ।
८३. पउमचरिउ ४ । ६, ७ ।
८२. पद्म० २७१-१३४ ।
८४. पद्म० २।१३५-१५४, पउमचरिउ १०८ ।
८५. पद्म० २१२३०-२४९, ३२३, १६-२२, पउमचरिउ १।९, १० ।
८६. पद्म० ३ २४ ९० पउमचरिउ १।११, १२, १३ ।
८७. पद्म० ३।९१-१५३, पउमचरिउ १।१३, १४-१६ ।