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समयाभाव से हम जितना करना चाहते थे, उसका एक अंश भी नहीं करसके । फिरभी हमने उचित समझा कि जो कुछ अबतक हुआ है उसे जनता के सामने रखदें, और आगे के लिए काम चालू रक्खें ।
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प्रस्तुत कोश में न्यायालयों में काम आने वाले अंगरेज़ी शब्दों और वाक्यों के हिंदी पर्याय दियेगए हैं । हमारे कुछ मित्रों का कहना था इनसे वकील तथा बड़े अफसर तो लाभ उठा सकेंगे, पर अंगरेजी न जानने वाले मुहर्रिरों तथा अन्य छोटे कर्मचारियों का कोई भला न होगा । यह संभव था कि अंगरेजी शब्द के बाद उबू पर्याय देकर तब हिन्दी पर्याय दिया जाता । पर ऐसा करने से उर्दू शब्द अकारादि क्रम में न होते, तथा उन्हें ढूँढने में जो कठिनाई पड़ती, उससे उनकी उपयोगिता कम होजाती । इसी लिये यह विचार स्थगित कर दिया गया । यदि प्रावश्यकता देखीगई तो एक उर्दू - हिन्दी कोष शीघ्र ही प्रकाशित किया जायगा ।
इस कोश का रूप स्थिर करने में कई बातों पर विचार करना पड़ा। कई मित्रों का मत था कि प्रचलित शब्दों का रूप बदलने की आवश्यकता नहीं है । कमसे कम, 'अपील', 'डिगरी' जैसे शब्द इतने चलाये हैं कि इनके पर्याय इनसे क्लिष्ट होंगे। बहुत सोच विचार के बाद हमें यह मत ठीक न जंचा । हमारी राय अन्त में यही रही कि पर्याय होना चाहिये और संस्कृतमूलक होना चाहिये । 'अपील' और 'डिक्री' जैसे शब्द ज्यों के त्यों रखदेना यों तो ठीक जान पड़ता है, पर जब इनसे 'अपीलांट', 'ऐपेलेट', 'डिक्रिटल' इत्यादि शब्द बनेंगे, तब कुछ करते धरते न बनपड़ेगा ।
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